

गत वर्ष की तुलना में 9000 से अधिक किसानों ने लिया फसल बीमा का सुरक्षा कवच, 84000 से अधिक हेक्टेयर रकबा बीमित
धमतरी। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के प्रति जिले के किसानों का विश्वास लगातार मजबूत होता जा रहा है।खरीफ 2026 में जिले के 80,920 किसानों ने 84,277.75 हेक्टेयर क्षेत्रफल का फसल बीमा कराया है, जो पिछले पांच वर्षों में सर्वाधिक आंकड़ा है।यह
पिछले वर्ष खरीफ 2025 में 71,572 किसानों ने 75,977.28 हेक्टेयर क्षेत्रफल का बीमा कराया था। इस वर्ष इसमें उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है, जिसमें 9,348 अधिक किसानों ने योजना का लाभ लेते हुए अपनी फसलों को सुरक्षा कवच प्रदान किया है।यह वृद्धि दर्शाती है कि किसान अब प्राकृतिक आपदाओं और अनिश्चित मौसम से होने वाले नुकसान के प्रति अधिक सतर्क और जागरूक हो रहे हैं,जो प्रशासनिक प्रयासों और जनजागरूकता अभियानों की सफलता को दर्शाता है।राज्य शासन द्वारा किसानों को प्राकृतिक आपदाओं, अनियमित वर्षा, सूखा, अतिवृष्टि एवं अन्य मौसमीय जोखिमों से होने वाली फसल क्षति से बचाने के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को प्रभावी ढंग से लागू किया जा रहा है। इसी दिशा में जिला प्रशासन धमतरी ने भी सक्रिय भूमिका निभाते हुए किसानों तक योजना की जानकारी पहुंचाने और उन्हें इससे जोड़ने के लिए व्यापक स्तर पर प्रयास किए हैं,कृषि विभाग द्वारा ग्राम स्तर पर लगातार शिविरों का आयोजन किया गया, जिनमें किसानों को योजना की विस्तृत जानकारी दी गई।साथ ही किसानों को यह भी बताया गया कि किस प्रकार यह योजना उनकी आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित कर सकती है।किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए पंजीयन प्रक्रिया को सरल बनाया गया और चॉइस सेंटर, एडीसीसी बैंक सहित अन्य अधिकृत संस्थानों के माध्यम से पंजीयन की व्यवस्था की गई। इससे ग्रामीण क्षेत्रों के किसानों को बिना किसी कठिनाई के योजना से जुड़ने का अवसर मिला। विशेष रूप से बदलते मौसम और संभावित जोखिमों को देखते हुए किसानों को समय पर बीमा कराने के लिए लगातार प्रेरित किया गया।कलेक्टर ने कहा कि किसानों की मेहनत और उनकी फसलों की सुरक्षा जिला प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना किसानों के लिए एक मजबूत आर्थिक सुरक्षा कवच है, जो उन्हें प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान की स्थिति में राहत प्रदान करती है।कहा कि इस वर्ष रिकॉर्ड संख्या में किसानों का बीमा कराना प्रशासन, कृषि विभाग और किसानों के संयुक्त प्रयासों का परिणाम है।


