सबकी योजना, सबका विकास” को धरातल पर उतारने की दिशा में कार्यशाला सम्पन्न

धमतरी। जिला पंचायत में “सबकी योजना, सबका विकास”को केंद्र में रखते हुए एक व्यापक एवं प्रभावी कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य ग्राम स्तर पर योजनाओं के निर्माण,उनके पारदर्शी क्रियान्वयन तथा समावेशी ग्रामीण विकास को सशक्त बनाना रहा।कलेक्टर ने कहा कि ग्रामीण विकास की सुदृढ़ नींव गांवों से ही तैयार होती है।जब योजनाएं जनभागीदारी के साथ बनती हैं, तब उनका प्रभाव अधिक व्यापक, टिकाऊ और परिणामकारी होता है।यह योजना तभी सार्थक होगा, जब प्रत्येक नागरिक की भागीदारी सुनिश्चित हो तथा योजनाएं गांव की वास्तविक आवश्यकताओं पर आधारित हों।कलेक्टर ने सरपंचों और सचिवों से ग्राम सभा को सक्रिय एवं सशक्त बनाने, पारदर्शिता बनाए रखने तथा अंतिम व्यक्ति तक लाभ पहुंचाने का आह्वान किया।यह अभियान 2 अक्टूबर से शुरू होकर ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबी उन्मूलन, स्वास्थ्य, शिक्षा और सतत विकास लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित करता है।
कार्यशाला में जिले के लगभग 30 ग्राम पंचायतों के सरपंच एवं सचिवों ने सहभागिता करते हुए ग्राम विकास की वर्तमान स्थिति, चुनौतियों और संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया।इस दौरान ग्राम स्तरीय नियोजन, संसाधनों के बेहतर उपयोग तथा योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष जोर दिया गया।वहीं समर्थन फाउंडेशन ने सामाजिक मानचित्रण (Social Mapping) की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इसके माध्यम से गांव के सामाजिक, आर्थिक एवं भौगोलिक पहलुओं का समग्र आकलन किया जा सकता है।इससे यह पहचानने में सहायता मिलती है कि किन क्षेत्रों एवं वर्गों तक योजनाओं का लाभ नहीं पहुंच पा रहा है।प्रोजेक्टर के माध्यम से व्यावहारिक उदाहरणों सहित योजनाओं के निर्माण और क्रियान्वयन की प्रक्रिया को विस्तार से समझाया।कार्यशाला में ग्राम विकास योजना (GPDP) तैयार करने पर विशेष बल देते हुए कहा गया कि प्रत्येक पंचायत को शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, सड़क, स्वच्छता, रोजगार एवं सामाजिक सुरक्षा जैसे सभी प्रमुख क्षेत्रों को शामिल करते हुए समग्र विकास योजना तैयार करनी चाहिए। इस प्रक्रिया में ग्राम सभा की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया गया, जहां नागरिक अपनी समस्याएं एवं सुझाव प्रस्तुत कर सकते हैं।15वें वित्त आयोग की राशि के प्रभावी एवं पारदर्शी उपयोग पर भी विस्तार से चर्चा की गई।सामाजिक न्याय एवं समावेशिता को ग्राम विकास का मूल आधार बताते हुए कहा कि पंचायतों को कमजोर एवं वंचित वर्गों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए विशेष प्रयास करने होंगे। पारदर्शिता, जवाबदेही एवं निष्पक्षता को पंचायत कार्यप्रणाली का अभिन्न हिस्सा बनाने पर जोर दिया गया।

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