

नियमित कृत्रिम गर्भाधान, समय पर टीकाकरण और नस्ल सुधार को बनाया जीवन का हिस्सा
धमतरी। अक्सर यह माना जाता है कि बढ़ती उम्र के साथ कार्य करने की क्षमता कम हो जाती है, लेकिन धमतरी जिले के ग्राम सिलघट निवासी 75 वर्षीय धनऊ (भजनाहा) सोनकर इस धारणा को गलत साबित कर रहे हैं,उम्र के इस पड़ाव में भी उनका उत्साह, अनुशासन और पशुपालन के प्रति समर्पण युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है।सोनकर प्रतिदिन स्वयं खेतों से हरा चारा काटते हैं और उसे साइकिल से घर तक लाते हैं, वर्तमान में उनके पास कुल चार गौवंशीय पशु हैं, इनकी देखभाल, चारा-पानी की व्यवस्था, स्वच्छता और पालन-पोषण का पूरा दायित्व वे स्वयं निभाते हैं।पिछले कई वर्षों से वे अपने पशुओं में कृत्रिम गर्भाधान (Artificial Insemination) नियमित रूप से कराते आ रहे हैं,यह तत्परता बताती है कि वे बेहतर नस्ल और अधिक दुग्ध उत्पादन के लिए वैज्ञानिक तरीकों को कितनी गंभीरता से अपनाते हैं,एवीएफओ चंद्रशेखर बताते हैं कि,जब से उनकी इस क्षेत्र में पदस्थापना हुई है, तब से सोनकर अपने पशुओं में नियमित कृत्रिम गर्भाधान कराकर नस्ल सुधार अभियान में निरंतर सहयोग कर रहे हैं। ऐसे जागरूक पशुपालकों के कारण ही क्षेत्र में उच्च गुणवत्ता वाली दुग्ध उत्पादक नस्लों का विकास संभव हो पाया है,इतना ही नहीं, सोनकर प्रत्येक वर्ष अवांछित (नाटे) नस्ल के सांडों का बधियाकरण भी कराते हैं तथा अपने सभी पशुओं का आवश्यक टीकाकरण समय पर सुनिश्चित करते हैं। पशुओं के स्वास्थ्य, नस्ल सुधार और वैज्ञानिक प्रबंधन को वे सर्वोच्च प्राथमिकता देते हैं।सोनकर का मानना है कि पशुपालन केवल अतिरिक्त आय का साधन नहीं, बल्कि ग्रामीण परिवारों की आत्मनिर्भरता का मजबूत आधार है। नियमित देखभाल, संतुलित पोषण, समय पर उपचार और वैज्ञानिक प्रबंधन से पशु स्वस्थ रहते हैं, दुग्ध उत्पादन बढ़ता है और परिवार की आय में भी निरंतर वृद्धि होती है।


