
जल संकट वाले क्षेत्रों के लिए बनेगी विशेष कार्ययोजना
धमतरी। जिले में भू-जल स्तर के संरक्षण एवं संवर्धन को लेकर संचालित “मोर गाँव मोर पानी” अभियान के तहत धमतरी एवं कुरूद को भू-जल दोहन की स्थिति के आधार पर क्रमशः क्रिटिकल एवं सेमी-क्रिटिकल श्रेणी में चिन्हित किया गया है।इसके तहत एनआईटी रायपुर की विशेषज्ञ टीम चयनित ग्रामों में उपलब्ध भू-जल की स्थिति, जल स्रोतों की क्षमता, जल स्तर में हो रहे बदलाव तथा वर्षा जल के संरक्षण की संभावनाओं का वैज्ञानिक विश्लेषण करेगी एवं यह भी आकलन किया जाएगा कि किस गांव में कितना भू-जल उपलब्ध है, जल संरक्षण की वर्तमान स्थिति क्या है तथा किन उपायों से भू-जल स्तर को बेहतर बनाया जा सकता है,हाइड्रोजियोलॉजिकल सर्वे एवं स्पॉट स्टडी के आधार पर जल संरक्षण एवं भू-जल पुनर्भरण के लिए सबसे उपयुक्त संरचनाओं की पहचान की जाएगी,जिसके लिए कलेक्टर द्वारा राज्य स्तर पर प्रेषित प्रस्ताव में अनुरोध किया गया है कि विशेषज्ञ चयनित ग्रामों एवं स्थलों का स्पॉट स्टडी तथा हाइड्रोजियोलॉजिकल सर्वे कर भू-जल संरक्षण एवं संवर्धन के लिए उपयुक्त संरचनाओं की पहचान करें। साथ ही उनके तकनीकी डिजाइन, संभावित प्रभाव, जल पुनर्भरण क्षमता तथा क्रियान्वयन की कार्ययोजना संबंधी विस्तृत तकनीकी प्रतिवेदन तैयार किया जाए।
इस संबंध में एनआईटी रायपुर के सहायक प्राध्यापक ने अवगत कराया है कि प्रभावी अनुशंसाओं एवं दीर्घकालिक परिणामों के लिए व्यापक वैज्ञानिक अध्ययन आवश्यक होगा तथा अध्ययन कार्य हेतु प्रस्तावित ग्रामों एवं स्थलों की संख्या तथा उनका विवरण उपलब्ध कराया जा रहा है, ताकि संस्थान द्वारा विस्तृत कार्ययोजना, तकनीकी प्रस्ताव तथा आवश्यक वित्तीय प्रावधान का आकलन तैयार किया जा सकेगा,साथ ही राज्य मनरेगा आयुक्त कार्यालय द्वारा भी जिला प्रशासन से धमतरी एवं कुरूद विकासखंड के उन ग्रामों एवं स्थलों की विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराने को कहा गया है, जहां अध्ययन कार्य कराया जाना प्रस्तावित है,जिसके उपरांत एनआईटी रायपुर द्वारा अध्ययन की रूपरेखा, समय-सीमा, तकनीकी आवश्यकताओं एवं व्यय संबंधी प्रस्ताव प्रस्तुत किया जाएगा एवं अध्ययन के निष्कर्षों के आधार पर मनरेगा तथा अन्य ग्रामीण विकास योजनाओं के अंतर्गत जल संरक्षण एवं भू-जल पुनर्भरण संबंधी कार्यों को प्राथमिकता के साथ क्रियान्वित किया जाएगा। विशेष रूप से उन क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा जहां प्रतिवर्ष जल संकट या भू-जल की कमी की स्थिति बनी रहती है,और वैज्ञानिक अनुशंसाओं के अनुरूप जल संरचनाओं का निर्माण एवं सुधार कर दीर्घकालिक जल सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में कार्य किया जाएगा।


