विराग मुनि के 135 वां दिन की तपस्या पर जनप्रतिनिधि व समाजसेवी ने, क्षेत्र के खुशहाली व सुख- समृद्धि की प्रार्थना

जीवन में कर्तव्य का पालन व शक्ति के सदुपयोग से ही व्यक्ति बनता है महान-: विराग मुनि

चिलचिलाती गर्मी और उमस भी मुनिश्री की साधना, आराधना और तपस्या के सामने है नतमस्तक

धमतरी। जैन मुनि गणिवार्य विरभद्र विराग महाराज सहित अन्य साधुजनों का मंगल विहार इतवारी बाजार स्थित जैन मंदिर में हुआ है,जहां उनके दर्शन लाभ, आशीर्वाद प्राप्त करने तथा प्रवचन श्रवण करने हेतु प्रतिदिन सैकड़ों श्रद्धालुओं का भीड़ लग रहा है,उनके द्वारा अविरल 135 वां पूरी श्रद्धा, भक्ति एवं आस्था के साथ उपवास संपन्न किया गया, इसके बाद भी अनवरत उपवास का क्रम जारी रहेगा,ऐसे पवित्र अवसर पर उनसे आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए सर्व गुजराती समाज छत्तीसगढ़ के प्रदेश अध्यक्ष एवं भारतीय जनता पार्टी प्रदेश सह कार्यालय मंत्री प्रीतेश गांधी एवं धर्म प्रेमी समाज सेवी पंडित राजेश शर्मा,एवं पूर्व सभापति राजेंद्र शर्मा, पार्षदगण पिंटू यादव,कुलेश सोनी, ने आशीर्वाद प्राप्त करते हुए क्षेत्र एवं क्षेत्र वासियों के सुख एवं समृद्धि के लिए की प्रार्थना, विराग मुनि ने सभी को आशिर्वाद एवं मंगलमय जीवन की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आज के भौतिकवादी युग में व्यक्ति अपने अधिकार की बात करता है, लेकिन कर्तव्य को समझकर पालन करने से दूर हो जाता है,यदि प्रत्येक व्यक्ति अपने कर्तव्य का नैतिक रूप से पालन करते हुए समाज द्वारा प्रदत्त शक्ति का सदुपयोग करें तो सर्वत्र सुख ,शांति एवं खुशहाली का वास होगा और यही से उन्नति का द्वार खुलता है।कहा कि अयोध्या में प्रभु राम के विराजमान होने के बाद अब प्रत्येक व्यक्ति को अपने हृदय में भगवान राम को बैठना है,इसके लिए मर्यादा पुरुषोत्तम के सांस्कृतिक मूल्यों एवं चरित्र का अनुसरण करने का ही एकमात्र रास्ता है, वहीं देश के प्रधानमंत्री के द्वारा साधु, संत, मुनि, सहित सनातन परंपरा के धर्म एवं अध्यात्म पर दिए योगदान को समर्पण का एक युग बताते हुए कहा कि उनका व्यक्तित्व, पद के ऊपर भारी हो गया है, इसलिए देश के आम जनमानस में वे सर्व स्वीकार्य हो गए हैं।वहीं इस अवसर पर पं.राजेश शर्मा ने कहा किशहर के धार्मिक एवं आध्यात्मिक धरातल पर तपस्वियों का चरण वंदन है सौभाग्यशालीक्षण तथा संत समाज की धरोहर, चरित्र एवं राष्ट्र निर्माण में है इनका महत्वपूर्ण भूमिका ,वहीं राजेंद्र शर्मा ने कहा धर्म की पावन भूमि तथा भाईचारे की नगरी फिर हुई धन्य

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