

मेखलाकार पहाड़ी पर स्थित प्राचीन आश्रम और प्राकृतिक सौंदर्य को संवारने की दिशा में पहल
धमतरी। नगरी विकासखंड के मेचका गांव के समीप मेखलाकार पहाड़ी पर स्थित मुचुकुंद ऋषि की तपोस्थली श्रद्धा, अध्यात्म और प्रकृति के अद्भुत संगम के रूप में जानी जाती है,यह स्थल धार्मिक आस्था के साथ-साथ प्रकृति एवं साहसिक पर्यटन की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण संभावनाएं रखता है।पौराणिक मान्यताओं के अनुसार मुचुकुंद महाराज इक्ष्वाकु वंश के प्रतापी राजा मांधाता के पुत्र थे। इसी से जुड़ी अनेक पौराणिक कथाएं मुचुकुंद ऋषि की तपस्या और उनकी आध्यात्मिक शक्ति का उल्लेख करती हैं। सिहावा-नगरी का अंचल प्राचीन काल से ही ऋषि-मुनियों की तपोभूमि के रूप में प्रतिष्ठित रहा है और सप्तऋषियों की तपस्थली से जुड़ी मान्यताएं इस क्षेत्र की आध्यात्मिक पहचान को और समृद्ध करती हैं।मांदागिरी पर्वत पर स्थित आश्रम के आसपास प्राकृतिक सौंदर्य देखते ही बनता है। यहां सुंदर तालाब, प्राचीन मूर्तियां तथा माता सीता सहित देवी-देवताओं की प्रतिमाएं श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र हैं,स्थानीय वनवासी समुदाय सहित दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालु यहां पूजा-अर्चना कर मन्नत मांगते हैं,यहां ट्रेकिंग की भी संभावना है।पहाड़ी से आसपास के वनांचल और सोंढूर जलाशय का मनोरम दृश्य दिखाई देता है, जो पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन सकता है।कलेक्टर ने कहा कि “मांदागिरी में मुचुकुंद ऋषि की तपोस्थली धमतरी की समृद्ध आध्यात्मिक और प्राकृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है,इस क्षेत्र की धार्मिक मान्यताओं, प्राकृतिक सौंदर्य और पर्यटन संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए स्थल का समग्र विकास किया जा सकता है।वे जल्द ही टीम के साथ मांदागिरी का भ्रमण कर वहां की वर्तमान स्थिति और आवश्यक व्यवस्थाओं का जायजा लेंगे।


