
नस्ल सुधार, वैज्ञानिक पशुपालन और बेहतर प्रबंधन से प्रतिदिन 35 से 40 लीटर दूध उत्पादन, डेयरी व्यवसाय से 40 से 50 हजार रुपये मासिक आय
धमतरी। जिले के कुरूद विकासखंड के ग्राम करगा निवासी अंगेश्वर कुर्रे ने डेयरी उद्यमिता योजनाओं, पशुधन नस्ल सुधार और वैज्ञानिक पशुपालन तकनीकों को अपनाकर डेयरी व्यवसाय को अपनी आजीविका का सशक्त माध्यम बनाया एवं अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के साथ अन्य लोगों को भी रोजगार उपलब्ध करा रहे हैं।अंगेश्वर कुर्रे बताते हैं कि प्रारंभ में वे देशी गायों का पालन करते थे। दूध उत्पादन कम होने के कारण आमदनी भी सीमित थी। पशुपालन विभाग के मार्गदर्शन में कृत्रिम गर्भाधान के माध्यम से देशी गायों में नस्ल सुधार की प्रक्रिया अपनाई,इससे प्राप्त उन्नत नस्ल की बछियों के पालन-पोषण के लिए उन्नत मादा वत्स पालन योजना के तहत 90 प्रतिशत अनुदान पर 6 क्विंटल पशु आहार उपलब्ध कराया गया। इस सहयोग से उनके पशुधन की गुणवत्ता में सुधार हुआ और डेयरी व्यवसाय को आगे बढ़ाने का आधार तैयार हुआ।इसी क्रम में वर्ष 2024-25 में राज्य डेयरी उद्यमिता योजना का लाभ लेते हुए दो उन्नत नस्ल की गिर गाय खरीदी।योजना के तहत 93,240 रुपये का शासकीय अनुदान प्राप्त हुआ,इससे डेयरी व्यवसाय को विस्तार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।आज कुर्रे के डेयरी फार्म में जर्सी, गिर, साहिवाल, थारपारकर और रेड सिंधी जैसी विभिन्न नस्लों की लगभग 25 गायें हैं। वे प्रतिदिन करीब 35 से 40 लीटर दूध का उत्पादन करते हैं।साथ ही आसपास के अन्य पशुपालकों से भी दूध खरीदकर अभनपुर और रायपुर जैसे शहरों में उसका विपणन करते हैं। दूध व्यवसाय से उन्हें प्रतिमाह लगभग 40 से 50 हजार रुपये की आय प्राप्त हो रही है।डेयरी व्यवसाय से बढ़ी आय से अपने परिवार के आवश्यकताओं को बेहतर ढंग से पूरा करने में सक्षम हुए तथा पैरा कट्टी मशीन भी खरीदी है, जिसके माध्यम से पैरा कट्टी तैयार कर बेचने का अतिरिक्त व्यवसाय कर रहे हैं। इस कार्य से 2 से 3 लोगों को स्थानीय स्तर पर रोजगार भी उपलब्ध कराया है।


