
कलेक्टर ने दिए लक्ष्य आधारित कार्य के निर्देश, प्राकृतिक खेती, कार्बन क्रेडिट और कृषि विविधीकरण पर विशेष जोर
किसानों की आय बढ़ाने, तकनीक आधारित कृषि एवं विभागीय समन्वय से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने पर बल
धमतरी। कलेक्टर ने कृषि, पशुपालन, मत्स्य पालन एवं उद्यानिकी विभागों की संयुक्त समीक्षा बैठक लेकर विभिन्न योजनाओं एवं कार्यक्रमों की प्रगति का विस्तृत अवलोकन करते हुए अधिकारियों से कहा कि शासन की प्रत्येक योजना का अंतिम उद्देश्य किसानों की आय में वृद्धि, उत्पादन क्षमता का विस्तार तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करना है।कलेक्टर ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के अंतर्गत शत-प्रतिशत ई-केवाईसी शीघ्र पूर्ण कराने के निर्देश देते हुए कहा कि पात्र किसानों को किसी भी प्रकार की तकनीकी अथवा प्रशासनिक बाधा के कारण लाभ से वंचित नहीं होना चाहिए तथा प्राकृतिक खेती एवं औषधीय पौधों की खेती को भविष्य की टिकाऊ कृषि व्यवस्था बताते हुए कलेक्टर ने कहा कि जिले में बीते वर्ष इस दिशा में उल्लेखनीय कार्य हुआ है। अब इसके रकबे का व्यापक विस्तार किया जाए,इसके लिए सभी वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारियों (एसएडीओ) को न्यूनतम 100-100 एकड़ का लक्ष्य निर्धारित करते हुए ग्राम स्तर पर चौपाल, कृषक संवाद एवं प्रदर्शन के माध्यम से किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित करने के निर्देश दिए।साथ ही कार्बन क्रेडिट परियोजना की समीक्षा के दौरान कलेक्टर ने चयनित गांवों एवं किसानों की ऑनबोर्डिंग प्रक्रिया की जानकारी लेते हुए रबी सीजन के लिए अभी से गांवों एवं किसानों का चयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। अधिकारियों ने बताया कि आगामी रबी सीजन में 50 हजार हेक्टेयर क्षेत्र को परियोजना से जोड़ने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। परियोजना के अंतर्गत किसानों को वैज्ञानिक सैंपलिंग, तकनीकी मार्गदर्शन एवं विशेषज्ञों का सहयोग भी उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ अतिरिक्त आय के अवसर विकसित होंगे।कलेक्टर ने कृषि अधिकारियों को नियमित फील्ड भ्रमण करने, विकासखंडवार लक्ष्य निर्धारित कर प्रगति की सतत समीक्षा करने तथा कृषि महाविद्यालय एवं कृषि के विद्यार्थियों की सहभागिता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।इसकी शुरुआत प्रारंभिक रूप से कुरूद विकासखंड से की जाएगी,साथ ही कृषि विज्ञान केंद्र के महत्वपूर्ण कार्यों एवं आईडब्ल्यूएमपी के कार्यों को वीबी-जी राम योजना से अभिसरण (कन्वर्जेंस) करते हुए प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए,मत्स्य पालन एवं पशुपालन विभाग की समीक्षा के दौरान कलेक्टर ने मछली पालन एवं बकरी पालन से जुड़े अधिकाधिक हितग्राहियों के किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) प्रकरण तैयार करने के निर्देश दिए।वहीं पैक्स समितियों द्वारा ड्रोन तकनीक के माध्यम से किए जा रहे कृषि कार्यों की समीक्षा करते हुए कलेक्टर ने निर्देश दिए कि ड्रोन सेवा का शुल्क किसानों की क्षमता के अनुरूप रखा जाए, जिससे आधुनिक तकनीक का अधिकाधिक उपयोग हो सके और कृषि कार्यों की लागत में कमी आए।कलेक्टर ने जिले में प्रस्तावित रिवर इकोनॉमिक क्लस्टर एंड लाइवलीहुड योजना के अंतर्गत नदी तटीय गांवों में कृषि, पशुपालन, मत्स्य पालन, उद्यानिकी तथा पैक्स समितियों के कार्यों का एकीकृत मॉडल विकसित करने के निर्देश दिए।कहा कि यह योजना ग्रामीण आजीविका, स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग एवं मूल्य संवर्धन के माध्यम से नदी आधारित अर्थव्यवस्था को नई दिशा देगी तथा उद्यानिकी विभाग की समीक्षा के दौरान,मसाला क्षेत्र विस्तार, फल एवं सब्जी उत्पादन, पुष्पोत्पादन तथा अन्य उद्यानिकी योजनाओं की प्रगति की जानकारी लेते हुए कलेक्टर ने निर्देश दिए कि प्रत्येक विकासखंड को उसकी भौगोलिक एवं कृषि-जलवायु परिस्थितियों के अनुरूप विशेष फसल आधारित पहचान विकसित की जाए। साथ ही प्रदान संस्था के सहयोग से उद्यानिकी गतिविधियों का विस्तार करते हुए हॉर्टिकल्चर डेवलपमेंट से संबंधित अधिकाधिक प्रकरण तैयार कर किसानों को योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराया जाए।वहीं बैठक के अंत में कलेक्टर ने कहा कि कृषि एवं संबद्ध विभागों के बीच बेहतर समन्वय, नवाचार, आधुनिक तकनीक के उपयोग तथा नियमित मैदानी मॉनिटरिंग से ही किसानों की आय में वृद्धि, कृषि का विविधीकरण और जिले की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति प्रदान की जा सकती है।अतः सभी विभागों को निर्धारित लक्ष्यों की सतत समीक्षा करते हुए गुणवत्तापूर्ण परिणाम सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।


