

23 लाख मछली बीज प्राप्त कर आत्मनिर्भरता की ओर बढ़े हरिश्चंद्र जांगड़े
धमतरी। ग्रामीण आजीविका को सुदृढ़ बनाने तथा मत्स्य उत्पादन में वृद्धि के उद्देश्य से संचालित स्पॉन संवर्धन योजना जिले के मत्स्य पालकों के लिए वरदान साबित हो रही है। इसी कड़ी में 27 जुलाई को शासकीय मत्स्य बीज प्रक्षेत्र, सांकरा में ग्राम पंचायत चरमुडिया के हितग्राही हरिश्चंद्र जांगड़े को योजना के तहत 23 लाख स्पॉन (जीरा आकार के मछली बीज) का वितरण किया गया।यह सहायता उनके मत्स्य पालन व्यवसाय को नई दिशा देने के साथ-साथ आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।उनका मानना है कि यदि समय पर गुणवत्तायुक्त मछली बीज उपलब्ध हो जाए तो उत्पादन में वृद्धि के साथ बेहतर आय अर्जित की जा सकती है। पहले उन्हें निजी स्रोतों से महंगे दाम पर बीज खरीदना पड़ता था, जिससे लागत बढ़ जाती थी और कई बार गुणवत्तापूर्ण बीज भी उपलब्ध नहीं हो पाता था,अब स्पॉन संवर्धन योजना के माध्यम से प्रमाणित एवं स्वस्थ मछली बीज सहज रूप से उपलब्ध हो रहा है, जिससे उनकी उत्पादन लागत कम होगी और बेहतर परिणाम प्राप्त होंगे।वैज्ञानिक पद्धति से संवर्धित कर आगे फिंगरलिंग एवं मत्स्य बीज के रूप में विकसित किया जाएगा,इससे न केवल स्थानीय स्तर पर गुणवत्तायुक्त मछली बीज की उपलब्धता बढ़ेगी, बल्कि आसपास के मत्स्य पालकों को भी समय पर बीज उपलब्ध कराया जा सकेगा। परिणामस्वरूप जिले में मत्स्य उत्पादन बढ़ेगा, रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी,मौसमी तालाबों में मत्स्य बीज (स्पॉन) संवर्धन कर मत्स्य बीज विक्रय से स्वरोजगार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के हितग्राहियों को मत्स्य बीज (स्पॉन) संवर्धन,तालाब सुधार एवं इनपुट्स मत्स्य बीज (स्पॉन) आदि हेतु रुपए 30000 की आर्थिक सहायता उपलब्ध करायी जाती है।

जांगड़े बताते हैं कि मत्स्य पालन आज पारंपरिक व्यवसाय से बढ़कर लाभकारी उद्यम का स्वरूप ले चुका है।आधुनिक तकनीकों, वैज्ञानिक प्रबंधन और शासन की योजनाओं के सहयोग से कम समय में बेहतर उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है,आगामी वर्षों में अपने मत्स्य बीज उत्पादन का विस्तार करना तथा अन्य युवाओं और किसानों को भी इस क्षेत्र से जोड़ना है।स्पॉन संवर्धन योजना का उद्देश्य केवल मछली बीज का वितरण करना नहीं, बल्कि जिले में गुणवत्तापूर्ण मत्स्य बीज उत्पादन की आत्मनिर्भर व्यवस्था विकसित करना है ताकि हितग्राहियों को तकनीकी मार्गदर्शन, वैज्ञानिक पालन पद्धति तथा समय-समय पर आवश्यक सलाह भी उपलब्ध कराई जाती है, जिससे उत्पादन की गुणवत्ता और सफलता दर में वृद्धि हो।जांगड़े ने इस योजना के लिए राज्य शासन एवं मत्स्य विभाग के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह सहायता उनके लिए नई संभावनाओं का द्वार खोलने वाली है। उनका विश्वास है कि गुणवत्तापूर्ण मछली बीज के माध्यम से वे बेहतर उत्पादन प्राप्त कर अपनी आय में उल्लेखनीय वृद्धि करेंगे और अन्य मत्स्य पालकों के लिए भी प्रेरणा बनेंगे।


