

सड़क, पुल-पुलिया बिजली, आवास, शिक्षा, स्वास्थ्य और पर्यटन विकास पर प्रशासन, जनप्रतिनिधियों व संघर्ष समिति के बीच हुई चर्चा
धमतरी। उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व क्षेत्र के 34 प्रभावित गांवों की वर्षों पुरानी मूलभूत समस्याओं के समाधान की दिशा में जिला प्रशासन ने की पहल।कलेक्टर की अध्यक्षता में नगरी जनपद पंचायत सभाकक्ष में जिला प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और जल-जंगल-जमीन संघर्ष समिति के पदाधिकारियों के साथ विस्तृत बैठक आयोजित हुई। बैठक में सड़क, पुल-पुलिया, बिजली, आवास, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, वनग्रामों के राजस्व ग्राम में परिवर्तन तथा पर्यटन विकास जैसे अहम मुद्दों पर गंभीर चर्चा हुई और समाधान के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार करने पर सहमति बनी।बैठक में संघर्ष समिति के प्रतिनिधियों ने बताया कि क्षेत्रवासी पिछले दो से तीन दशकों से मूलभूत सुविधाओं की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक अपेक्षित विकास नहीं हो पाया है, इस पर कलेक्टर ने कहा कि प्रशासन भी चाहता है कि टाइगर रिजर्व क्षेत्र के लोगों को सभी आवश्यक सुविधाएं मिलें,हालांकि वन एवं न्यायालय से जुड़े कुछ कानूनी प्रावधानों के कारण कार्यों में विलंब हुआ है।कहा कि जिन कार्यों को तत्काल किया जा सकता है, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाएगा।कलेक्टर ने बताया कि अरसीकन्हार-रिसगांव सड़क निर्माण के प्रयास जारी हैं तथा बेलरगांव-बोरई सड़क स्वीकृत हो चुकी है।बारिश के दौरान जिन गांवों का संपर्क टूट जाता है, वहां पहले पुल और पुलिया का निर्माण कराया जाएगा, ताकि लोगों को वर्षभर आवागमन की सुविधा मिल सके। स्टील ब्रिज सहित छोटे पुलों के निर्माण को भी प्राथमिकता में रखा जाएगा।विधायक अंबिका मरकाम ने कहा कि उदंती-सीतानदी क्षेत्र के ग्रामीण लंबे समय से सड़क, पुल-पुलिया, बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य और आवास जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं,कहा कि लोगों के विकास और उनके संवैधानिक अधिकारों को सुनिश्चित करना सरकार और प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है।विधायक ने प्रशासन से विकास कार्यों में तेजी लाने, ग्रामीणों की समस्याओं का समयबद्ध समाधान करने तथा वन संरक्षण और जनहित के बीच संतुलन बनाकर योजनाओं को धरातल पर उतारने की आवश्यकता पर जोर दिया,जिस पर डीएफओ ने बताया कि सर्वाेच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुसार कोर टाइगर रिजर्व क्षेत्र में स्थायी पक्के निर्माण की अनुमति नहीं है। ऐसे में ग्रामीणों की सहमति और नियमानुसार कच्ची सड़कों का निर्माण कराया जा सकता है।कहा कि क्षेत्र वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास है, इसलिए विकास कार्यों में पर्यावरण संरक्षण का विशेष ध्यान रखा जाएगा।


