रुद्रेश्वर मंदिर परिसर का होगा समग्र विकास, 20 करोड़ की लागत से बनेगा भव्य कॉरिडोर

धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक विरासत और आधुनिक सुविधाओं का अद्भुत संगम बनेगा रुद्रेश्वर धाम

धमतरी। शहर से लगे ग्राम रुद्री स्थित प्राचीन रुद्रेश्वर महादेव मंदिर परिसर को धार्मिक, सांस्कृतिक एवं पर्यटन दृष्टि से विकसित करने हेतु एक समग्र विकास प्रस्ताव तैयार किया गया है,लगभग 20 करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित यह कॉरिडोर परियोजना भारत सरकार के संस्कृति एवं पर्यटन मंत्रालय के माध्यम से तीन चरणों में विकसित की जाएगी।साय सरकार सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा देते हुए कई बार मंचों से कहा भी है,कि रुद्रेश्वर महादेव मंदिर परिसर का यह समग्र विकास छत्तीसगढ़ की समृद्ध धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान देने वाला महत्वपूर्ण कदम है।यह परियोजना केवल मंदिर परिसर के सौंदर्यीकरण तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि पर्यटन, स्थानीय रोजगार और सांस्कृतिक संरक्षण को भी बढ़ावा देगी।राज्य सरकार का प्रयास है कि श्रद्धालुओं को आस्था के साथ आधुनिक सुविधाएं भी उपलब्ध हों और रुद्रेश्वर धाम राष्ट्रीय स्तर पर एक प्रमुख धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में स्थापित हो।वहीं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह ने अधिकारियों को कहा कि रुद्रेश्वर महादेव मंदिर कॉरिडोर परियोजना भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक परंपरा और आधुनिक अधोसंरचना का उत्कृष्ट उदाहरण बनेगी।भारत सरकार देश के धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्थलों को संरक्षित और विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है,अतःयह परियोजना क्षेत्रीय पर्यटन को नई गति देने के साथ-साथ देश की प्राचीन मंदिर स्थापत्य परंपरा को भी सशक्त रूप से प्रस्तुत करेगी।

महापौर ने कहा कि रुद्रेश्वर मंदिर परिसर का विकास धमतरी शहर के लिए गौरव का विषय है,इस परियोजना से श्रद्धालुओं और पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी तथा शहर की धार्मिक एवं सांस्कृतिक पहचान और मजबूत होगी। आधुनिक सुविधाओं, सुव्यवस्थित यातायात व्यवस्था और सौंदर्यपूर्ण विकास के माध्यम से यह परिसर आने वाले समय में धमतरी की नई पहचान बनकर उभरेगा।
मंदिर के मुख्य फेशियल फसाड (मुख भाग) को पारंपरिक शिव मंदिर स्थापत्य शैली के अनुरूप विकसित करने पर विशेष ध्यान दिया गया है।विशेष बात यह है कि यह संपूर्ण विकास कार्य वर्तमान मंदिर संरचना को बिना किसी क्षति एवं बिना बड़े विध्वंस के प्रस्तावित किया गया है। मंदिर परिसर को एकीकृत एवं सुव्यवस्थित स्वरूप देने के लिए प्रवेश द्वार, सीढ़ियाँ, परिक्रमा पथ, घाट, मंडप तथा सार्वजनिक उपयोग के क्षेत्रों का सुनियोजित विकास किया जाएगा।
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए परिसर में चौड़े पैदल मार्ग, डिजिटल सूचना स्क्रीन, विश्राम क्षेत्र, प्रसाद एवं स्मृति चिन्ह दुकानें, फूड कोर्ट, शिशु आहार कक्ष, भुगतान आधारित स्वच्छ शौचालय, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तथा एआई आधारित हेल्थ चेकअप कियोस्क जैसी आधुनिक सुविधाएँ विकसित की जाएंगी।तथा वृद्धजन एवं दिव्यांगजनों के लिए रैम्प आधारित बाधारहित आवागमन व्यवस्था भी प्रस्तावित है।घाट क्षेत्र को सुरक्षित एवं सुव्यवस्थित स्वरूप देने हेतु रेलिंग युक्त विसर्जन कुंड विकसित किया जाएगा।डिजाइन में सोमनाथ मंदिर परिसर, काशी विश्वनाथ कॉरिडोर एवं जगन्नाथ कॉरिडोर जैसी भारतीय मंदिर स्थापत्य अवधारणाओं से प्रेरणा ली गई है, जिससे पारंपरिकता एवं आधुनिक शहरी नियोजन का संतुलित समावेश सुनिश्चित हो सके।वहीं पर्यावरण संरक्षण एवं सतत विकास को भी परियोजना का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है।जिससे पर्यावरणीय प्रभाव कम होने के साथ स्थानीय कारीगरों एवं रोजगार को भी प्रोत्साहन मिलेगा।परिसर में यातायात एवं जनसंचार व्यवस्था को सुगम बनाने हेतु पृथक प्रवेश एवं निकास मार्ग, सेवा पथ, आपातकालीन पहुँच मार्ग तथा श्रद्धालु-केंद्रित संचलन प्रणाली विकसित की जाएगी।कलेक्टर ने कहा कि यह विकास केवल अधोसंरचना निर्माण तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह क्षेत्र की धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक विरासत और पर्यटन संभावनाओं को नई पहचान देने वाला महत्वपूर्ण प्रयास सिद्ध होगा।कहा कि परियोजना में पारंपरिक भारतीय स्थापत्य, पर्यावरणीय संतुलन एवं आधुनिक सुविधाओं का समन्वय करते हुए श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों के लिए विश्वस्तरीय अनुभव विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है।

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