सहकारी क्षेत्र में उर्वरक वितरण के लिए राज्य शासन ने जारी किए दिशा-निर्देश

कृषकों को समय पर एवं समानुपातिक मात्रा में उर्वरक उपलब्ध कराने की पहल
संतुलित उर्वरक उपयोग, लागत में कमी और भूमि उर्वरा संरक्षण पर विशेष जोर

धमतरी। राज्य शासन द्वारा आगामी खरीफ वर्ष के लिए सहकारी क्षेत्र में उर्वरक वितरण संबंधी आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।इसके तहत रासायनिक उर्वरकों के साथ जैव उर्वरक, जैविक खाद, हरी खाद एवं नीलहरित काई जैसे वैकल्पिक उपायों के उपयोग को प्रोत्साहित किया जाएगा।खाड़ी क्षेत्र में वर्तमान तनावपूर्ण परिस्थितियों को देखते हुए राज्य शासन ने सभी कृषकों को समय पर और समानुपातिक मात्रा में उर्वरक उपलब्ध कराने हेतु विशेष रणनीति तैयार की है।शासन का उद्देश्य किसानों को गुणवत्तायुक्त उर्वरक उपलब्ध कराना, कृषि लागत को कम करना तथा उर्वरकों के दुरुपयोग को रोकना है।जारी निर्देशों के अनुसार खरीफ 2025 में कृषकों को वितरित यूरिया की 80 प्रतिशत मात्रा तथा डीएपी की 60 प्रतिशत मात्रा ही खरीफ 2026 में प्रारंभिक रूप से वितरित की जाएगी,जिन कृषकों की भूमि धारिता 5 एकड़ से अधिक है, उन्हें निर्धारित मात्रा के अनुसार यूरिया तीन किश्तों में वितरित किया जाएगा। दूसरी किश्त पहली किश्त के 20 दिवस बाद तथा तीसरी किश्त दूसरी किश्त के 20 दिवस बाद दी जाएगी। इससे उर्वरकों का संतुलित उपयोग सुनिश्चित होगा तथा अनावश्यक भंडारण एवं दुरुपयोग पर रोक लगेगी,निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि उर्वरक वितरण की गणना बोरी के आधार पर की जाएगी।अतः कृषि विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि उर्वरक नियंत्रण आदेश 1985 के प्रावधानों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करें तथा कृषकों को संतुलित उर्वरक उपयोग के प्रति जागरूक करें तथा सहकारी समितियों के माध्यम से उर्वरकों के पारदर्शी वितरण, नियमित मॉनिटरिंग एवं पर्याप्त भंडारण की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाएगी।

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