
दो लाख रुपये के ऋण और प्रशिक्षण से मिली नई राह, रक्षाबंधन पर मुख्यमंत्री को ‘भैया’ कहकर जताया आभार
धमतरी। कभी परिवार की जिम्मेदारियों के बीच अपने पति के ईंट व्यवसाय को संभालने की कल्पना भी नहीं की थी। पति के निधन के बाद ग्राम लोहरसी की कुसुम शर्मा के सामने परिवार को संभालने के साथ आजीविका का संकट भी खड़ा हो गया।ऐसे कठिन समय में महिला एवं बाल विकास विभाग की ‘सक्षम योजना’ उनके लिए उम्मीद की किरण बनकर सामने आई।कुसुम ने योजना की जानकारी जुटाई और आत्मनिर्भर बनने का निर्णय लिया तथा आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर योजना के तहत आवेदन किया।दो लाख रुपये का ऋण प्राप्त हुआ,ऋण मिलने के बाद उन्होंने व्यवसाय से संबंधित आवश्यक प्रशिक्षण लिया और धीरे-धीरे पति के छोड़े हुए ईंट व्यवसाय को स्वयं संभालना शुरू किया।कुसुम बताती हैं कि शुरुआत में उनके लिए यह काम आसान नहीं था। व्यवसाय की बारीकियों से परिचित होने के साथ आर्थिक संसाधनों का प्रबंधन करना भी नई चुनौती थी। लेकिन प्रशिक्षण, ऋण से मिली आर्थिक सहायता और स्वयं कुछ करने के मजबूत संकल्प ने उनका आत्मविश्वास बढ़ाया और आज वह अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास कर रही हैं। व्यवसाय से होने वाली आय ने उनके परिवार की आर्थिक स्थिति को पहले की तुलना में बेहतर बनाया है और उन्हें आत्मनिर्भरता का नया भरोसा मिला है।कुसुम का मानना है कि महिलाओं को यदि सही समय पर मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और आर्थिक सहयोग मिले, तो वे परिवार के साथ-साथ समाज और अर्थव्यवस्था के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।रक्षाबंधन के अवसर पर मुख्यमंत्री को शुभकामनाएं देते हुए और उसके प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहती है कि महिलाओं के लिए शासन द्वारा संचालित योजनाएं उनके जैसी एकल महिलाओं के लिए नई उम्मीद और आत्मविश्वास लेकर आई हैं।


