
स्रोत महोत्सव 2026 में कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने जिले में किए जा रहे जल संरक्षण कार्यों का दिया प्रस्तुतिकरण
धमतरी। नदियां केवल जल का स्रोत नहीं, बल्कि हमारी सभ्यता, संस्कृति, कृषि और समृद्धि की जीवनधारा हैं। छत्तीसगढ़ को धान का कटोरा बनाने में प्रदेश की जीवनदायिनी नदियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। जिन नदियों ने हमारी सभ्यता को पोषित किया और हमें समृद्धि दी, उनका संरक्षण हम सभी का दायित्व है।यह बात मुख्यमंत्री ने राजधानी रायपुर के ओमाया गार्डन में आयोजित ‘स्रोत महोत्सव 2026’ एवं राज्य स्तरीय कार्यशाला को संबोधित करते हुए कही।मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में जल संरक्षण पर आधारित ‘नीर-नारी-निधि’ पुस्तक का विमोचन भी किया। पुस्तक में जल संरक्षण, जल प्रबंधन, नारी सहभागिता तथा जल संपदा के संरक्षण की दिशा में किए जा रहे प्रयासों, अनुभवों और नवाचारों का दस्तावेजीकरण किया गया है। कार्यक्रम का उद्देश्य प्रदेश की नदियों एवं उनके स्रोत क्षेत्रों के संरक्षण, संवर्धन और पुनर्जीवन के लिए सामूहिक प्रयासों को गति देना है।प्रदेश के 11 नदी-बहुल जिलों में नदी एवं उनके स्रोत क्षेत्रों के विकास तथा संरक्षण को लेकर विशेष पहल की जा रही है। इसी क्रम में धमतरी जिले में महानदी के संरक्षण और संवर्धन के लिए किए जा रहे कार्यों को भी राज्य स्तरीय मंच पर प्रस्तुत किया गया। कलेक्टर ने जिले में महानदी के संरक्षण, जलस्रोतों के संवर्धन और जल उपलब्धता को मजबूत करने के लिए किए जा रहे प्रयासों का विस्तृत प्रस्तुतिकरण दिया।साथ ही स्थानीय समुदायों, ग्राम पंचायतों, महिला स्व-सहायता समूहों और जनभागीदारी के माध्यम से जल संरक्षण को जनअभियान का स्वरूप देने की आवश्यकता पर भी प्रकाश डाला।कहा कि जल संरक्षण केवल किसी एक विभाग की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और आम नागरिकों की सामूहिक जिम्मेदारी है। महानदी और उसके स्रोतों का संरक्षण आने वाली पीढ़ियों के लिए जल सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।स्रोत महोत्सव के माध्यम से नदी एवं जलस्रोत संरक्षण के क्षेत्र में किए जा रहे उत्कृष्ट कार्यों, स्थानीय नवाचारों और जनभागीदारी के प्रयासों को साझा करने के साथ ही विभिन्न जिलों के अनुभवों से सीख लेकर प्रभावी जल संरक्षण मॉडल विकसित करने पर भी जोर दिया गया। इसकी काफ़ी काफ़ी सराहना हुई ।


