जन संवाद-2.0 – ग्राम सभाओं में जनभागीदारी से तय होंगी विकास की प्राथमिकताएं

20 अगस्त से ग्राम सभाओं में आयोजित होंगी पांच प्रमुख गतिविधियां, ग्रामीणों की आवाज बनेगी गांव के विकास का आधार

धमतरी। जिले में ग्राम स्वराज, सुशासन और सहभागी विकास की अवधारणा को सशक्त बनाने के उद्देश्य से कलेक्टर के निर्देशन तथा सीइओ जयंत नाहटा के मार्गदर्शन में धमतरी, कुरूद, मगरलोड एवं नगरी विकासखंड की ग्राम सभाओं में 20 अगस्त से “जन संवाद-2.0 : विकसित भारत ग्राम संकल्प” अभियान का आयोजन किया जाएगा।यह अभियान विकसित भारत-ग्राम जी अधिनियम 2025 की भावना के अनुरूप ग्रामीणों को विकास प्रक्रिया का सक्रिय भागीदार बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।इसके माध्यम से ग्रामीण अपनी प्राथमिकताओं को सामने रख सकेंगे, पंचायत प्रतिनिधियों से सीधे बातचीत कर सकेंगे तथा अपने गांव के भविष्य की परिकल्पना साझा कर सकेंगे।ग्राम सभाएं केवल योजनाओं की जानकारी का मंच नहीं रहेंगी, बल्कि गांव के सामूहिक संकल्प, जनभागीदारी और जवाबदेही का प्रभावी माध्यम बनेंगी।सीइओ जयंत नाहटा ने कहा कि विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा, जब गांव का प्रत्येक नागरिक विकास प्रक्रिया में सहभागी बने।जन संवाद-2.0 ग्रामीणों को अधिकारों के प्रति जागरूक करने, स्थानीय आवश्यकताओं को सामने लाने तथा पंचायतों को अधिक पारदर्शी और उत्तरदायी बनाने का कार्य करेगा।इस अभियान के अंतर्गत पांच प्रमुख गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। “मेरे गांव की प्राथमिकता” वोटिंग वॉल के माध्यम से ग्रामीण पेयजल, सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका, सिंचाई एवं अन्य आवश्यक विकास कार्यों की प्राथमिकताएं तय करेंगे। “125 दिन रोजगार-मेरा अधिकार” शपथ के जरिए ग्रामीणों को रोजगार संबंधी अधिकारों और योजनाओं के प्रति जागरूक किया जाएगा।इसी प्रकार “विकसित भारत संदेश कार्ड” के माध्यम से ग्रामीण अपने सपनों के गांव की कल्पना और सुझाव साझा करेंगे, जबकि “जनता पूछे-पंचायत बताए” संवाद मंच पंचायत और ग्रामीणों के बीच पारदर्शी संवाद एवं सामाजिक जवाबदेही को मजबूत करेगा। अभियान की पांचवीं गतिविधि “तिरंगे के साथ विकास संदेश” होगी, जिसमें ग्रामीण राष्ट्र निर्माण और विकसित गांव के संकल्प का संदेश देंगे,दौरान ग्राम सभाओं में योजनाओं की जानकारी, सामाजिक सहभागिता, स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग, महिला एवं युवा सहभागिता तथा सामुदायिक विकास के विषयों पर भी विशेष चर्चा की जाएगी। इससे ग्राम पंचायतों की कार्ययोजना अधिक जनकेंद्रित, पारदर्शी और स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार हो सकेगी।

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