
“बच्चों की पढ़ाई सबसे बड़ा निवेश” — कलेक्टर ने दिया प्रेरक संदेश
गांव के बच्चों की आंखों में चमका आईएएस, डॉक्टर और सैनिक बनने का सपना
धमतरी। ग्राम कातलबोड़ में आयोजित निःशुल्क शैक्षिक एवं करियर मार्गदर्शन शिविर केवल एक प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं, बल्कि ग्रामीण बच्चों के सपनों को नई उड़ान देने वाला प्रेरक सामाजिक अभियान बनकर उभरा है,साहू समाज बांनगर परिक्षेत्र द्वारा कर्मचारी प्रकोष्ठ के निर्देशन में संचालित इस शिविर ने शिक्षा, संस्कार, करियर जागरूकता और सामाजिक चेतना को एक साथ जोड़ते हुए गांवों में सकारात्मक परिवर्तन की मजबूत नींव रखी है।इस समापन समारोह में कलेक्टर ने विद्यार्थियों, पालकों और शिक्षकों को कहा कि “बच्चों की पढ़ाई सबसे बड़ा निवेश है,आज बच्चों को सही दिशा और अवसर देना ही समाज का सबसे बड़ा दायित्व है।अतःपालकों से आग्रह किया कि वे बच्चों को मोबाइल की लत से दूर रखते हुए शिक्षा और संस्कार की ओर प्रेरित करें।कलेक्टर ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि कक्षा आठवीं में लगाया गया एक समर कैंप उनके जीवन का “टर्निंग पॉइंट” बना था।कहा कि विद्यार्थियों को संघर्ष से सीखने, असफलताओं से मजबूत बनने और सफलता मिलने पर विनम्र बने रहने की सीख दी। यहीं प्रेरक शब्दों ने बच्चों में आत्मविश्वास और आगे बढ़ने की नई ऊर्जा भर दी।
चार वर्षों से लगातार संचालित यह शिविर अब ग्रामीण प्रतिभाओं के लिए आशा का केंद्र बन चुका है। यहां प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी, प्रयास विद्यालय प्रवेश परीक्षा मार्गदर्शन, कक्षा 9वीं से 12वीं तक कठिन विषयों का अध्यापन, नैतिक शिक्षा, संगीत प्रशिक्षण और करियर काउंसलिंग जैसी गतिविधियां पूरी तरह निःशुल्क संचालित की जा रही हैं,जिसमें जिले के वरिष्ठ अधिकारी, शिक्षक और विशेषज्ञ बिना किसी मानदेय के बच्चों को समय देकर उनके भविष्य को संवारने में जुटे हैं।कार्यक्रम की शुरुआत “मैं हूं गुल्लक अभियान” से हुई, जिसमें समाजसेवी तुमनचंद साहू एवं रंजीता साहू ने 300 बच्चों को गुल्लक और पेंटिंग किट वितरित की। गुल्लक पेंटिंग प्रतियोगिता में बच्चों ने अपने सपनों और सामाजिक सरोकारों को रंगों में उकेरा। साथ ही जल संरक्षण, पर्यावरण सुरक्षा और पक्षी बचाओ जैसे विषयों पर बच्चों की संवेदनशील सोच ने सभी को प्रभावित किया।जिस पर कलेक्टर ने बच्चों की रचनात्मकता की सराहना करते हुए शीर्ष 10 प्रतिभागियों को मेडल और पुस्तकें प्रदान कर सम्मानित किया।शिविर की सबसे बड़ी ताकत सामुदायिक सहभागिता रही। शिक्षक स्वयं के संसाधनों से आकर निःशुल्क अध्यापन कर रहे हैं, जबकि ग्रामीणों और समाज के सहयोग से बच्चों के लिए स्वल्पाहार, परिवहन और अध्ययन सामग्री की व्यवस्था की गई। कर्मचारी प्रकोष्ठ द्वारा निर्मित “कर्म ग्रंथालय” में प्रतियोगी परीक्षाओं से संबंधित लगभग डेढ़ लाख रुपये मूल्य की पुस्तकें विद्यार्थियों को निःशुल्क उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिससे ग्रामीण विद्यार्थियों को बेहतर अध्ययन संसाधन मिल रहे हैं।पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक जागरूकता को भी शिविर से प्रभावी रूप से जोड़ा गया।इस परिक्षेत्र के 12 गांवों में इस वर्ष नशा मुक्ति, करियर जागरूकता, स्वास्थ्य और संस्कार विषयों पर सामाजिक कार्यशालाएं भी आयोजित की गईं। इन सतत प्रयासों का सकारात्मक प्रभाव अब गांवों में दिखाई देने लगा है, जहां शिक्षा, सामाजिक सुधार और नशा उन्मूलन को लेकर नई चेतना विकसित हो रही है।


