ग्रामीण विकास को नई दिशा देने कलेक्टर ने की बैठक

मॉडल गांव, जल संरक्षण और डिजिटल पंचायत पर विशेष फोकस

धमतरी। जिले के ग्रामीण क्षेत्रों को आधुनिक सुविधाओं और सतत विकास से जोड़ने के उद्देश्य से कलेक्टर ने धमतरी, कुरूद, मगरलोड एवं नगरी विकासखंड के पंचायत सचिवों की मैराथन बैठक लेकर ग्रामीण विकास की विभिन्न योजनाओं और संभावनाओं की विस्तृत समीक्षा की।कहा कि ग्रामीण विकास केवल योजनाओं के क्रियान्वयन तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि गांवों की वास्तविक आवश्यकताओं और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए दीर्घकालिक एवं स्थायी विकास कार्य किए जाएं।गांवों में स्वच्छता, स्ट्रीट लाइट, चौपाटी निर्माण, सौंदर्यीकरण, वृक्षारोपण और सार्वजनिक परिसरों के व्यवस्थित विकास को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए।साथ ही प्रत्येक पंचायत को विकास कार्यों की रूपरेखा तैयार करने कहा।एवं डिजिटल पंचायत की अवधारणा पर विशेष जोर देते हुए निर्देश दिए कि प्रत्येक ग्राम पंचायत भवन में टीवी, डीटीएच कनेक्शन एवं इंटरनेट सुविधा उपलब्ध कराई जाए, ताकि ग्रामीण युवा प्रतियोगी परीक्षाओं, ऑनलाइन अध्ययन सामग्री और विभिन्न शैक्षणिक गतिविधियों से जुड़ सकें।साथ ही पंचायत स्तर पर लाइब्रेरी स्थापित करने तथा अध्ययन के लिए अनुकूल वातावरण विकसित करने पर भी बल दिया,सचिवों को निर्देशित किया कि पंचायत कार्यालयों में सचिव का नाम एवं मोबाइल नंबर प्रदर्शित करने हेतु सूचना बोर्ड अनिवार्य रूप से लगाए जाएं, जिससे ग्रामीणों को आवश्यक जानकारी एवं सेवाएं आसानी से उपलब्ध हो सकें।वहीं अटल व्यावसायिक परिसर निर्माण की समीक्षा करते हुए कलेक्टर ने उन ग्राम पंचायतों को शीघ्र प्रस्ताव प्रस्तुत करने के निर्देश दिये, जो प्रस्ताव नहीं भेजे हैं।कहा कि चयनित गांवों को मॉडल गांव के रूप में विकसित करने की कार्ययोजना तैयार की जा रही है, जहां आधुनिक आधारभूत सुविधाओं, आजीविका संवर्धन, स्वच्छता एवं डिजिटल सेवाओं का समेकित विकास किया जाएगा।साथ ही जल संरक्षण को लेकर सचिवों को निर्देश दिए कि जल संकट प्रभावित क्षेत्रों में धान की खेती नहीं करने संबंधी प्रस्ताव पारित कराए जाएं।साथ ही वर्षा जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए शासकीय भवनों, पंचायत परिसरों, सामुदायिक भवनों एवं आवास परिसरों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम अनिवार्य रूप से विकसित करने पर जोर दिया, जल संरक्षण भविष्य की सबसे बड़ी आवश्यकता है और इसके लिए जनभागीदारी आधारित प्रयास किए जाने चाहिए।पंचायत सचिवों से गांवों में आय के स्थायी स्रोत विकसित करने, स्थानीय बाजारों की पारदर्शी नीलामी कराने तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में पहल करने कहा।

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