

आधुनिक “रिसर्च कम इंटीग्रेटेड प्रोडक्शन एडवांसमेंट ब्रीडिंग सेंटर” के रूप में किया जाएगा विकसित
कलेक्टर ने स्थल निरीक्षण कर अधिकारियों एवं फर्म प्रतिनिधियों के साथ की विस्तृत चर्चा
धमतरी। कलेक्टर के दिशा-निर्देश एवं पहल पर भटगांव में बकरी पालन केंद्र स्थापित करने की पहल प्रारंभ की गई है।इसी के तहत आज कलेक्टर ने केंद्र स्थल का निरीक्षण कर ओडिशा की प्रतिष्ठित फर्म माणिकस्तु के प्रतिनिधियों, चीफ बिज़नेस ऑफिसर बिश्वबंधु पाढ़ी,मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत, एसडीएम, उप संचालक,तथा संबंधित विभागीय अधिकारियों के साथ विस्तृत चर्चा की।कहा कि भटगांव में बकरी पालन केंद्र को अत्याधुनिक “रिसर्च कम इंटीग्रेटेड प्रोडक्शन एडवांसमेंट ब्रीडिंग सेंटर”के रूप में विकसित किया जाएगा।इस परियोजना का उद्देश्य जिले में वैज्ञानिक बकरी पालन को प्रोत्साहित करना, उन्नत नस्ल विकास, पशुधन अनुसंधान, किसान प्रशिक्षण एवं ग्रामीण आजीविका संवर्धन हेतु एक आधुनिक एवं समग्र सुविधा केंद्र स्थापित करना है।कहा कि बकरी पालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था एवं छोटे किसानों की आय वृद्धि का प्रभावी माध्यम है,अधिकारियों को निर्देशित किया कि परियोजना के क्रियान्वयन हेतु चरणबद्ध कार्ययोजना तैयार कर आवश्यक प्रक्रियाएं शीघ्र पूर्ण की जाएं, ताकि केंद्र को जल्द से जल्द संचालित किया जा सके।यह केंद्र केवल बकरी पालन तक सीमित न रहकर ग्रामीण युवाओं, महिला समूहों, पशु सखियों एवं पशुपालकों के लिए प्रशिक्षण, रोजगार और उद्यमिता का प्रमुख केंद्र बनेगा।साथ ही कृत्रिम गर्भाधान (AI), पैथोलॉजी जांच, रोग निदान एवं अन्य पशु चिकित्सा सेवाओं के लिए अत्याधुनिक प्रयोगशाला स्थापित की जाएगी।वहीं जिले की पशु सखियों, पशुधन कार्यकर्ताओं एवं ग्रामीण युवाओं के प्रशिक्षण हेतु हॉस्टल-सह-प्रशिक्षण केंद्र विकसित करने का भी प्रावधान रखा गया है। इसके अतिरिक्त “फोडर कैफेटेरिया” की स्थापना कर विभिन्न प्रकार के हरे चारे एवं टिकाऊ पशु आहार पद्धतियों का प्रदर्शन किया जाएगा, जिससे पशुओं के पोषण स्तर एवं उत्पादकता में वृद्धि सुनिश्चित हो सके।साथ ही एक पारदर्शी किसान बाजार प्लेटफॉर्म भी विकसित किया जाएगा, जहां गुणवत्तापूर्ण एवं उन्नत नस्ल की बकरियों की खरीद-बिक्री निर्धारित एवं उचित मूल्य पर की जा सकेगी।प्रारंभिक चरण में इस परियोजना से लगभग 10 से 12 स्थानीय युवाओं को प्रत्यक्ष रोजगार उपलब्ध होने की संभावना है। वहीं बेहतर नस्ल, तकनीकी मार्गदर्शन, पशु चिकित्सा सहायता एवं उचित मूल्य व्यवस्था के माध्यम से जिले के पशुपालकों एवं किसानों की आय में वृद्धि का मार्ग भी प्रशस्त होगा।

