
तत्कालीन विवेचना अधिकारी निरीक्षक राजेश मरई होंगे एसपी द्वारा पुरस्कृत
धमतरी। प्रकरण के अनुसार 31 जनवरी 2025 की रात्रि लगभग 11 बजे मृतक शंकर ढीमर (24 वर्ष) अपने साथी रितेश पेंडरिया के साथ मराठापारा स्थित कार्यक्रम में भोजन करने गया था। कार्यक्रम से लौटने के बाद दोनों मराठा मंगल भवन के समीप पीपल के बैठे थे। इसी दौरान आरोपी मोनू उर्फ कुई ध्रुव एवं जन्मदेव सोरी वहां पहुंचे और मामूली विवाद को लेकर अपने पास रखे चाकू से मृतक के सीने, पेट एवं जांघ पर ताबड़तोड़ वार कर गंभीर रूप से घायल कर दिया। जिला अस्पताल ले जाने पर चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।घटना की सूचना मिलते ही थाना सिटी कोतवाली पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपियों को तत्काल गिरफ्तार कर लिया,पूछताछ में यह तथ्य सामने आया कि घटना से दो-तीन दिन पूर्व मृतक द्वारा आरोपी के मामा की साइकिल वापस नहीं किए जाने के कारण दोनों पक्षों के बीच मनमुटाव चल रहा था, इसी रंजिश में आरोपियों ने घटना को अंजाम दिया,इस संबंध में सिटी कोतवाली अपराध दर्ज कर धारा 103(1), 351(2) सहपठित धारा 3(5) भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत अपराध पंजीबद्ध कर न्यायालय में प्रस्तुत किया गया,जहां प्रकरण में अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत सशक्त साक्ष्यों एवं पुलिस की विवेचना के आधार पर न्यायालय ने आरोपियों को दोषसिद्ध पाते हुए आजीवन सश्रम कारावास तथा 500-500 रूपये के अर्थदंड से दंडित किया है।साथ ही विचारण अवधि के 529 दिनों का समायोजन भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 468 के अंतर्गत प्रदान किया गया।


