

धमतरी। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर पर्यावरण संरक्षण द्वारा जिला जेल परिसर में बीजारोपण आयोजित किया गया,जिसका उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण के प्रति जनजागरूकता बढ़ाना तथा अधिक से अधिक बीजारोपण से वृक्षारोपण के लिए समाज को प्रेरित करना था। विश्व पर्यावरण दिवस का सबसे बड़ा संदेश प्रकृति के साथ रहकर मानवता का विकास करना है।आज पर्यावरण में सबसे गंभीर समस्या हिमालय के सिकुड़ते ग्लेशियर, लगातार बढ़ती हीटवेव, असामान्य वर्षा, घटती जैव-विविधता, सूखते जलस्रोत और तेजी से बदलती जीवनशैली मिलकर एक ऐसे भविष्य की ओर संकेत कर रहे हैं, जहां पर्यावरण का प्रश्न सीधे मानव अस्तित्व, खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य, अर्थव्यवस्था और सामाजिक स्थिरता से जुड़ जाता है।
पर्यावरणीय संकट अब भविष्य की आशंका नहीं, बल्कि वर्तमान की वास्तविकता है।कार्यक्रम में मोहन लाल साहू ने कहा कि पर्यावरण संकट केवल वैज्ञानिक या सरकारी विषय नहीं है, बल्कि यह सामाजिक व्यवहार, जीवनशैली और सांस्कृतिक मूल्यों से भी गहराई से जुड़ा हुआ प्रश्न है। नई पीढ़ी और प्रकृति के बीच बढ़ती दूरी एक गंभीर चिंता हैं। भारतीय सांस्कृतिक परंपरा में प्रकृति के प्रति सम्मान का विशेष महत्व हैं,वृक्ष न केवल हमें ऑक्सीजन प्रदान करते हैं, बल्कि पर्यावरण संतुलन बनाए रखने, जल संरक्षण तथा जैव विविधता के संवर्धन के लिए भी महत्वपूर्ण हैं।अतःअधिक से अधिक वृक्षारोपण और संरक्षण के माध्यम से ही पर्यावरणीय संकट से बचा जा सकता है।भेदू प्रसाद साहू ने कहा पर्यावरण संरक्षण के लिए हम सबको अपने स्वभाव में सामान्य परिवर्तन कर पर्यावरण संकट से बचने के उपाय साझा किए और कहा अधिक से अधिक बीजों का संग्रहण एवं बीजों का रोपण करने का आग्रह किए।वही रोनित शहरे के द्वारा पर्यावरणीय गीत के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिए।


