
शहतूत खेती, कृमिपालन और धागाकरण से बढ़ रही किसानों एवं महिलाओं की आय
धमतरी। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने और किसानों को परंपरागत खेती के साथ आय के नए विकल्प उपलब्ध कराने की दिशा में जिले में सिल्क समग्र-2 योजना संचालित की जा रही है। केंद्र सरकार द्वारा प्रवर्तित यह योजना रेशम उत्पादन को बढ़ावा देने, ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन करने तथा किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।जिले में अब तक 37 किसानों का चयन कर शहतूत पौधरोपण का कार्य सफलतापूर्वक कराया जा चुका है, जिससे रेशम उत्पादन के क्षेत्र में नई संभावनाएं विकसित हो रही हैं।सिल्क समग्र-2 योजना मुख्य रूप से लघु एवं सीमांत किसानों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है।विभागीय अधिकारियों के अनुसार किसान वर्षभर में 5 से 6 बार कृमिपालन कर सकते हैं तथा खर्चों की कटौती के बाद एक किसान प्रतिवर्ष लगभग 1 लाख से 1.5 लाख रुपये तक की शुद्ध आय अर्जित कर आर्थिक रूप से मजबूत बन सकता है।इस योजना के अंतर्गत चयनित किसानों को चरणबद्ध तरीके से प्रत्येक हितग्राही को लगभग 5 लाख रुपये तक आर्थिक सहायता भी प्रदान की जा रही है,जिसमें 80 प्रतिशत राशि केंद्र एवं 20 प्रतिशत राशि राज्य सरकार द्वारा वहन की जा रही है।साथ ही रेशम विभाग द्वारा किसानों को तकनीकी प्रशिक्षण, समय-समय पर मार्गदर्शन तथा आवश्यक संसाधन भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं ताकि वे वैज्ञानिक पद्धति से कृमिपालन कर अधिक उत्पादन प्राप्त कर सकें। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार के नए अवसर विकसित हो रहे हैं तथा युवा वर्ग भी इस व्यवसाय की ओर आकर्षित हो रहा है।
कलेक्टर ने कहा कि सिल्क समग्र-2 योजना ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने वाली अत्यंत महत्वपूर्ण योजना है।कृषि के साथ वैकल्पिक आय के साधनों को बढ़ावा देना वर्तमान समय की आवश्यकता है और रेशम उत्पादन इस दिशा में एक प्रभावी माध्यम बनकर सामने आया है।बताया कि जिले में अधिक से अधिक पात्र किसानों को योजना से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है ताकि ग्रामीण परिवारों की आय में वृद्धि हो सके और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर उपलब्ध हों।यह भी कहा कि महिला स्व-सहायता समूहों एवं ग्रामीण युवाओं को रेशम उत्पादन और धागाकरण गतिविधियों से जोड़कर उन्हें आर्थिक रूप से सक्षम बनाया जाएगा।जिले में इस योजना के सकारात्मक परिणाम अब स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगे हैं।

