
धमतरी बन रहा निवेश और रोजगार का नया केंद्र
धमतरी। जिला आज केवल कृषि प्रधान क्षेत्र के रूप में ही नहीं, बल्कि औद्योगिक संभावनाओं से भरपूर उभरते हुए अपनी सशक्त पहचान बना रहा है।जिले की आंतरिक क्षमताओं, प्रचुर प्राकृतिक संसाधनों और नवाचार आधारित तकनीकी तालमेल के प्रभावी अभिशरण से यहां निवेश और रोजगार के नए अवसर निरंतर सृजित हो रहे हैं।यह न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति दे रहा है, बल्कि युवाओं को अपने ही जिले में आजीविका के बेहतर अवसर भी प्रदान कर रहा है।विशेषकर धान उत्पादन, औद्योगिक विकास का प्रमुख आधार बनी हुई है।साथ ही स्थानीय वनोपज के साथ-साथ बस्तर क्षेत्र से प्राप्त वनोपज उत्पादों का भी जिले में प्रसंस्करण किया जा रहा है। वर्तमान में वनोपज आधारित 12 इकाइयाँ स्थापित हैं, जो ग्रामीण एवं वनांचल क्षेत्रों में आजीविका के स्थायी साधन भी उपलब्ध करा रही हैं।लाख प्रसंस्करण इकाइयों के माध्यम से जिले से निर्यात होना, धमतरी की औद्योगिक क्षमता को राष्ट्रीय ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी स्थापित करता है।इन व्यापक संभावनाओं को दृष्टिगत रखते हुए बीते दो वर्षों में औद्योगिक अधोसंरचना के विकास पर विशेष ध्यान दिया गया है। भालुझूलन (11.00 हेक्टेयर) एवं करेलीबड़ी (14.00 हेक्टेयर) में औद्योगिक क्षेत्रों की स्थापना हेतु भूमि का आधिपत्य सीएसआईडीसी, रायपुर को सौंपा गया।जो जिले की औद्योगिक दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।इसी कड़ी में ग्राम श्यामतराई में लघु वनोपज प्रसंस्करण औद्योगिक क्षेत्र की स्थापना की गई है।वहीं ग्राम छाती में भूमि पर लैंड बैंक की स्थापना किया, जिससे भविष्य की औद्योगिक आवश्यकताओं के लिए ठोस आधार तैयार हुआ है।कलेक्टर ने कहा कि औद्योगिक विकास को लेकर राज्य शासन और जिला प्रशासन का स्पष्ट दृष्टिकोण है कि आने वाले समय में उद्योग, रोजगार और नवाचार के माध्यम से धमतरी को आत्मनिर्भर एवं समृद्ध जिला बनाने के लिए निरंतर प्रतिबद्ध रहेगा।


