जैविक खेती के प्रतीक बने थानेंद्र साहू

जिले से प्रथम बार राज्य स्तरीय डॉ. खूबचंद बघेल पुरस्कार पाने वाले
धमतरी। जिला लंबे समय से कृषि नवाचार और प्राकृतिक खेती के लिए जाना जाता है, जिसे “धनहा धमतरी” के नाम से भी प्रसिद्धि प्राप्त है। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए ग्राम हथबंध, उन्नतशील एवं जैविक कृषक थानेंद्र साहू का चयन राज्य स्तरीय डॉ. खूबचंद बघेल पुरस्कार हेतु किया गया है। यह प्रथम बार है जब जिले से किसी कृषक का चयन इस प्रतिष्ठित राज्य स्तरीय सम्मान के लिए हुआ है।रायपुर में आयोजित राज्योत्सव समारोह में यह सम्मान प्रदान किया जायेगा।साहू ने न केवल जैविक खेती को अपनाया, बल्कि अन्य किसानों के लिए प्रेरणा स्रोत भी बने हैं।साहू के पास कुल 6.156 हेक्टेयर भूमि है, जिसमें 4.16 हेक्टेयर क्षेत्र में विभिन्न सुगंधित और औषधीय धान जैसे नगरी दूबराज, देवभोग, तुलसी मंजरी, जंवाफूल, कबीर भोग, रेड राइस एवं ब्लैक राइस की खेती की जाती है।इन विशेष किस्मों की बाजार में सालभर मांग बनी रहती है और विक्रय प्रदेश के साथ अन्य राज्यों में भी किया जा रहा है।साहू द्वारा खेत की मेड़ों पर दलहन, तिलहन और उद्यानिकी फसलें भी ली जाती हैं। वे पूरी तरह जैविक खेती अपनाते हैं और जीवामृत, घनजीवामृत, नीमास्त्र, ब्रह्मास्त्र एवं अग्न्यास्त्र जैसे जैविक आदान स्वयं तैयार करते हैं। इससे लागत में कमी आई है और पर्यावरण पर दुष्प्रभाव भी घटा है। वे कृषि विभाग की आत्मा योजना से जुड़कर प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हैं तथा अपने ग्राम में नव युवक कृषक अभिरुचि समूह का गठन कर युवा कृषकों को जैविक और औषधीय धान की खेती के लिए प्रेरित कर रहे हैं। तथा रागी एवं अन्य लघुधान्य फसलों की भी खेती प्रारंभ की है। इसके साथ-साथ वे पशुपालन, कुक्कुट पालन, मत्स्य पालन और मशरूम उत्पादन के माध्यम से अतिरिक्त आमदनी अर्जित कर रहे हैं।

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