सौर सुजला योजना

सौर सुजला योजना राज्य के किसानों की खुशहाली का नया सूरज

धमतरी।  सौर सुजला योजना जहां पहले किसान केवल वर्षा आधारित खेती पर निर्भर रहते थे ,वहीं अब सूर्य की ऊर्जा से संचालित सोलर पंप किसानों के लिए बारहमासी खेती का साधन बन गए हैं।जिले में अब तक कुल 3068 सोलर पंपों की स्थापना राज्य अक्षय ऊर्जा विकास एजेंसी (क्रेडा) द्वारा की जा चुकी है।गांव-गांव में पूरे साल खेती कर पा रहे हैं, जिससे आय दोगुनी हुई है और जीवनशैली में सकारात्मक बदलाव आया है।किसानों की जुबानी ,ग्राम गोरेगांव के किसान अमृत लाल बताते हैं कि पहले बरसात पर ही खेती करना पड़ता था।सौर पंप लगने से साल भर सब्ज़ी और धान की खेती कर पा रहा हूँ। वहीं ग्राम चिपली के लक्ष्मी नाथ कहा कि“डीजल पंप से खेती करना बहुत महंगा पड़ता था।अब सूरज की रोशनी से खेतों को पानी मिलता है, कोई खर्च नहीं होता।रामेश्वर ने कहा कि पहले गांव में खेती छोड़कर बाहर नौकरी ढूँढने जाना पड़ता था।अब सोलर पंप से अच्छी खेती-बाड़ी हो रही है
कई महिला सब्ज़ी की खेती कर शहर में बेच रही है।किसानों को 90 प्रतिशत तक अनुदान शासन द्वारा दिया जाता है। केवल शेष राशि देनी होती है। इतना ही नहीं, एनिकट, स्टॉप डेम एवं चेक डेम के किनारों पर 3 से 5 एचपी क्षमता वाले सरफेस सोलर पंप 97 प्रतिशत अनुदान पर लगाए जा रहे हैं। इससे जल स्रोत के पास बसे छोटे और सीमांत किसान अत्यधिक लाभान्वित हो रहे हैं।

आर्थिक सामाजिक व पर्यावरण और सतत विकास की ओर कदम इस योजना ने जिले की कृषि व्यवस्था को एक नई दिशा दी है। किसान अब दोनों मौसम में खेती कर रहे हैं। उत्पादन बढ़ने से  आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है।न केवल किसानों की आय दोगुनी हुई है, बल्कि गांवों में रोजगार के अवसर भी बढ़े हैं।खेतों में मजदूरों, परिवहन और कृषि से जुड़ी गतिविधियों में रोजगार मिलने से बेरोजगारी की समस्या भी घट रही है।सौर ऊर्जा आधारित पंप पर्यावरण की दृष्टि से भी अत्यंत लाभकारी हैं।सौर पंप प्रदूषणमुक्त, किफायती और दीर्घकालीन समाधान प्रदान कर रहे हैं। यह योजना सतत विकास और हरित क्रांति की दिशा में एक मजबूत कदम है।
यह योजना न सिर्फ कृषि उत्पादन को नई ऊंचाई दे रही है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण है।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *