

स्वदेशी अपनाएं ,परंपरा सजाएं
धमतरी। कलेक्टर ने सभी नगरीय निकायों को निर्देशित किया कि
क्षेत्रों में मिट्टी के दीयों की बिक्री करने वाले ग्रामीणों एवं कुम्हारों से किसी भी प्रकार का कर या शुल्क न वसूला जाए। तथा निर्धारित स्थानों पर व्यवस्था की जाए।कारीगर हमारी सांस्कृतिक विरासत के संवाहक हैं और हस्तनिर्मित दीये हमारी लोककला और परंपरा की पहचान हैं।दीपावली पर्व जिलेभर में हर्षोल्लास और सौहार्द के साथ मनाया जाए। नागरिकों को मिट्टी के दीयों के उपयोग के लिए प्रेरित किया जाए तथा स्वदेशी उत्पादों की खरीदारी को बढ़ावा दिया जाए।कहा कि “दीपावली सिर्फ रोशनी का नहीं बल्कि आत्मनिर्भरता और स्वाभिमान का पर्व है।जब हम स्वदेशी वस्तुएं अपनाते हैं तो न केवल देश की अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाते हैं, बल्कि ग्रामीण शिल्पकारों को भी आजीविका का अवसर प्रदान करते हैं।कलेक्टर ने अपील की कि वे चीनी या प्लास्टिक से बने कृत्रिम प्रकाश उत्पादों की बजाय मिट्टी के दीये जलाएं, जिससे स्थानीय कुम्हारों को आर्थिक सहयोग मिले और पर्यावरण भी सुरक्षित रहे। साथ ही,स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी जन-जन तक पहुंचे।


