गंगरेल जलाशय का अनुबंध निरस्त

1200 से अधिक परिवारों को सीधी राहत ,अब रॉयल्टी आधार पर मिला मत्स्याखेट का अधिका

धमतरी। मछुआ सहकारी समितियों को पुनः मछली पालन का हक मिलने पर सदस्यों ने मुख्यमंत्री निवास पहुँचकर विष्णु देव साय का आभार जताते हुए अभिनंदन किया।गंगरेल डुबान क्षेत्र के तीन जिलों की 11 मछुआ सहकारी समितियों के सदस्यगण उपस्थित रहे।
मौके पर ग्रामीणों की मांग पर डुबान क्षेत्र में एक एम्बुलेंस उपलब्ध कराने और राष्ट्रीय बैंक की शाखा शीघ्र खोले जाने का आश्वासन दिया और कहा कि गरीबों और वंचितों के उत्थान के लिए हमारी सरकार लगातार प्रयासरत है। विभिन्न योजनाओं एवं कार्यक्रमों के माध्यम से आम जनता को अधिकार दिलाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर ही स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध हों और लोग सीधे लाभान्वित हो सकें।

गंगरेल जलाशय में 10 से अधिक मछुआ समितियां कार्यरत हैं। जिसमें 1200 से अधिक मछुआ परिवार मत्स्याखेट कर अपनी आजीविका प्राप्त करते थे। वर्ष 2023 से पूर्व में जलाशय को लीज पर प्रदान किया जाता था, जिससे मछुआ परिवारों को सुलभ आजीविका हेतु मछली प्राप्त होती थी। परन्तु वर्ष 2023 के बाद से मछुआ परिवारों को काम मिलना कम हो गया, जिससे आजीविका बुरी तरह प्रभावित हुआ।समितियों द्वारा जिला स्तर पर कलेक्टर को समस्या से अवगत कराया।मछुआरों की समस्याओं को ध्यान रखते हुए मुख्यमंत्री की पहल पर नियमानुसार कलेक्टर एवं छत्तीसगढ राज्य सहकारी मत्स्य महासंघ द्वारा दिनांक 8.8.2025 को गंगरेल जलाशय का अनुबंध निरस्त कर शासन ने नवीन मछलीपालन पूर्व नीति में आवश्यक सुधार कर पूर्व भांति लीज पर समितियों को दिलाने हेतु आश्वस्त किया।इस अवसर पर महापौर एवं पूर्व महिला आयोग उपस्थित थीं। डुबान क्षेत्र की 11 मछुआ समितियों में ग्राम उरपुरी, तेलगुड़ा, मोगरागहन, कोलियारी पुराना, कोलियारी नया, गंगरेल, फुटहामुड़ा, तुमाबुजुर्ग, अलोरी, भिलाई एवं देवीनवागांव के सदस्यगण सहित अन्य गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

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