किसान बने अपने कारोबार के मालिक, महिला नेतृत्व ने दिखाई नई राह

गट्टासिल्ली एफपीसी की पांच साल की यात्रा में सामूहिकता, स्वामित्व और ग्रामीण उद्यमिता की मजबूत तस्वीर

धमतरी। गांव की अर्थव्यवस्था केवल खेत में फसल उगाने से नहीं, बल्कि उत्पाद का बेहतर मूल्य पाने, बाजार से जुड़ने और सामूहिक निर्णय लेने की क्षमता से भी मजबूत होती है।गट्टासिल्ली फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी (एफपीसी) की पांच साल की यात्रा इसका उदाहरण है। यहां किसान और महिला किसान मिलकर न केवल अपने उत्पादों के लिए बाजार तलाश रहे हैं, बल्कि किसान-स्वामित्व वाले व्यवसाय की नई राह भी बना रहे हैं।सेवा संकल्प अभियान के तहत आयोजित एफपीसी की वार्षिक आमसभा में करीब 550 शेयरधारकों की भागीदारी रही। नगरी विकासखंड के पांचों सीएलएफ से पहुंचे महिला एवं पुरुष शेयरधारकों ने एफपीसी की पांच वर्षों की उपलब्धियों, व्यवसायिक गतिविधियों, वित्तीय स्थिति, ऑडिट, लाभ और आगामी योजनाओं की जानकारी ली तथा भविष्य की दिशा पर अपने सुझाव साझा किए।

चुनौती से विश्वास तक

एफपीसी की शुरुआत में किसानों, विशेषकर महिला किसानों को संगठित कर शेयरधारक बनाना और उनमें सामूहिक स्वामित्व की भावना विकसित करना चुनौती थी। लगातार संवाद और सामूहिक निर्णयों से यह चुनौती धीरे-धीरे विश्वास में बदली और आज शेयरधारक एफपीसी को अपनी संस्था और अपने व्यवसाय के रूप में देखते हुए निर्णय प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी निभा रहे हैं।

खेत से बाजार तक सामूहिक पहुंच

एफपीसी द्वारा सुगंधित धान, नगरी दुबराज, लघु वनोपज (NTFP) सहित कृषि एवं वन आधारित उत्पादों के सामूहिक विपणन के अवसर विकसित किए जा रहे हैं एवं सामूहिक प्रयास से किसानों को बाजार की मांग, गुणवत्ता और मूल्य की बेहतर जानकारी मिल रही है। इससे उत्पादन के साथ-साथ विपणन, मूल्य संवर्धन और व्यवसायिक समझ विकसित करने का अवसर भी मिल रहा है।

महिला नेतृत्व ने संभाली कमान

गट्टासिल्ली एफपीसी की यात्रा में महिला किसानों की भागीदारी उल्लेखनीय रही है। स्वयं सहायता समूहों और सीएलएफ से जुड़ी महिलाएं अब केवल लाभार्थी नहीं, बल्कि निर्णय प्रक्रिया और सामूहिक व्यवसाय में सक्रिय भागीदार हैं।वहीं बोर्ड एवं अन्य गतिविधियों में उनकी भूमिका ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महिला नेतृत्व को नई पहचान दे रही है।

कृषि और संस्कृति का संगम

वार्षिक आमसभा में व्यवसायिक चर्चा के साथ नगरी की कृषि और सांस्कृतिक पहचान की झलक भी देखने को मिली। पांचों सीएलएफ की ओर से सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी गईं। ‘छत्तीसगढ़ को धान का कटोरा क्यों कहा जाता है’ और पुनर्योजी कृषि जैसे विषयों पर प्रस्तुतियों के साथ बच्चों के नृत्य ने कार्यक्रम को जीवंत बनाया।पांच वर्षों की यात्रा के बाद एफपीसी के सामने उत्पाद विविधीकरण, गुणवत्ता सुधार, मूल्य संवर्धन, ब्रांडिंग, बेहतर बाजार संपर्क और डिजिटल माध्यमों के उपयोग जैसी संभावनाएं हैं। किसान-स्वामित्व की भावना और मजबूत होने से स्थानीय कृषि एवं वन उत्पादों को व्यापक बाजार से जोड़ने के नए अवसर विकसित हो सकते हैं।गट्टासिल्ली एफपीसी की कहानी केवल एक संस्था की यात्रा नहीं, बल्कि सामूहिकता से स्वामित्व, स्वामित्व से आत्मविश्वास और आत्मविश्वास से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते ग्रामीण बदलाव की तस्वीर है। इसमें किसान अपने कारोबार के हिस्सेदार बने हैं और महिला किसान नेतृत्व की भूमिका में आगे बढ़ रही हैं।

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