

महायज्ञ में 125 बच्चों का विद्यारंभ, 24 गर्भवती महिलाओं का पुंसवन संस्कार संपन्न
धमतरी। सोरिद में गायत्री परिवार द्वारा आयोजित चार दिवसीय पंचकुंडीय गायत्री महायज्ञ एवं संस्कार महोत्सव के तृतीय दिवस धार्मिक आस्था, संस्कार और परंपरा का अनुपम संगम देखने को मिला।इस अवसर पर बच्चों का विद्यारंभ एवं गर्भवती महिलाओं का पुंसवन संस्कार विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ संपन्न कराया गया।कार्यक्रम में कथा वाचक परमानंद महाराज ने कहा कि बच्चों के जीवन में मां ही प्रथम गुरु होती है।मां की गोद और उसकी पाठशाला से ही बालक के व्यक्तित्व का निर्माण प्रारंभ होता है। विद्यारंभ संस्कार बच्चों में प्रारंभ से ही शिक्षा के प्रति रुचि जागृत करता है, जो भविष्य की नींव बनता है।वहीं पुंसवन संस्कार के महत्व पर प्रकाश डालते हुए,कहा कि यह संस्कार गर्भस्थ शिशु के सर्वांगीण विकास हेतु अत्यंत आवश्यक है। इससे शिशु में संस्कार, चरित्र और ज्ञान के बीज गर्भावस्था से ही रोपित किए जाते हैं, जो वर्तमान समय की प्रमुख आवश्यकता है।बिना संस्कार के जीवन अधूरा है।इस अवसर पर गर्भवती महिलाओं को गायत्री मंत्र की पुस्तिका एवं गुरुदेव का साहित्य भेंटकर सम्मानित किया गया।


