

धान के साथ , रागी की खेती में बढ़ी भागीदारी
धमतरी। जिले में कृषि क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव दिखाई देने लगे हैं।पारंपरिक धान फसल के साथ-साथ अब किसान फसलचक्र परिवर्तन को अपनाते हुए,सरसों, चना, मक्का के साथ-साथ रागी (मंडुआ) की खेती में भी निरंतर वृद्धि दर्ज की जा रही है।जिले में वर्तमान रबी मौसम के दौरान दलहन फसलों के तहत चना, अरहर एवं मसूर की खेती की जा रही है।इसी कड़ी में मोटे अनाजों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से रागी फसल की खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। रागी कम लागत में अधिक पोषण देने वाली एवं कम पानी में तैयार होने वाली फसल है, जिससे छोटे एवं सीमांत किसानों को विशेष लाभ मिल रहा है। वर्तमान में जिले में रागी फसल लगभग 1,250 हेक्टेयर क्षेत्र में ली जा रही है, जिसमें करीब 1,180 किसान रागी की खेती कर रहे हैं। ग्राम पंडरीपानी (म) भटगांव,सिरकट्टा आदि में रागी की रोपाई का कार्य प्रगति पर है, जहां स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं खेतों में रागी की रोपाई कर आत्मनिर्भरता की मिसाल प्रस्तुत कर रही हैं। इससे ग्रामीण महिलाओं को रोजगार के अवसर मिलने के साथ-साथ उनकी आर्थिक स्थिति में भी सुधार हो रहा है।कलेक्टर श्री मिश्रा ने कहा कि दलहन, तिलहन एवं रागी जैसी फसलों से न केवल किसानों की आय में वृद्धि होगी, बल्कि पोषण सुरक्षा एवं प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में भी मदद मिलेगी।जिससे किसान जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का भी बेहतर ढंग से सामना कर सकेंगे। महिला किसानों की भागीदारी जिले के लिए अत्यंत सराहनीय है।


