
जिले में वर्तमान कुपोषण दर 8.23 प्रतिशत, समन्वित कार्ययोजना के साथ लक्षित कार्रवाई के दिए निर्देश
धमतरी। बैठक में मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने चिरायु टीम को निर्देशित किया कि सैम (Severe Acute Malnutrition) एवं मैम (Moderate Acute Malnutrition) बच्चों की स्क्रीनिंग के बाद तत्काल उपचार सुनिश्चित किया जाए।आरबीएसके टीम द्वारा चिन्हित एनीमिक बच्चों का नियमित फॉलोअप किया जाए तथा सुपरवाइजर की उपस्थिति में दवा सेवन कराया जाए।विभाग के आंकड़ों में कुपोषित बच्चों और गर्भवती महिलाओं की संख्या में किसी प्रकार का अंतर नहीं होना चाहिए।ठाकुर ने बैठक में समस्त सीडीपीओ एवं विकासखण्ड चिकित्सा अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि विकासखण्ड स्तर पर एसडीएम की अध्यक्षता में समन्वय बैठक आयोजित कर संयुक्त कार्ययोजना तैयार करें तथा नवाचार आधारित गतिविधियों के माध्यम से कुपोषण उन्मूलन की दिशा में प्रभावी पहल करें।यूनिसेफ की प्रभारी अधिकारी ने बताया कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं मितानिन संयुक्त रूप से गृहभेंट कर हितग्राहियों को परामर्श दें।किशोर बालिकाओं में एनीमिया की पहचान, नवविवाहित दंपत्तियों का सूचीकरण, सुरक्षित मातृत्व, हाईरिस्क गर्भावस्था की पहचान, शत-प्रतिशत संस्थागत प्रसव, जन्म के एक घंटे के भीतर स्तनपान, प्रसव पश्चात मातृ देखभाल, छह माह तक अनन्य स्तनपान, छह माह से तीन वर्ष तक पूरक आहार की नियमित निगरानी तथा तीन से छह वर्ष तक के बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा एवं विकासात्मक गतिविधियों पर संयुक्त रूप से कार्य करने पर जोर दिया।


