पं. दीनदयाल उपाध्याय पुण्यतिथि को,समर्पण दिवस के रूप में मनाया गया

भाजपा कार्यालय में अंत्योदय और एकात्म मानव दर्शन पर हुआ विस्तृत विमर्श

धमतरी। पंडित दीनदयाल उपाध्याय की पुण्यतिथि को समर्पण दिवस के रूप में भाजपा कार्यालय में मनाया गया।कार्यक्रम की शुरुआत प्रकाश बैस द्वारा प्रस्तावना के साथ की गई।कहा कि उपाध्याय का जीवन संगठन के प्रति समर्पण, सादगी और राष्ट्रसेवा का जीवंत उदाहरण है।अतःकार्यकर्ताओं से आग्रह किया कि वे दीनदयाल के विचारों को जन-जन तक पहुँचाने का कार्य करें।
रंजना साहू ने कहा कि उपाध्याय द्वारा प्रतिपादित “अंत्योदय” का सिद्धांत केवल एक विचार नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और समावेशी विकास का आधार है,उनका सपना था कि विकास की धारा समाज के हर वर्ग तक पहुँचे और कोई भी नागरिक अपने को उपेक्षित महसूस न करे।यह मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार दीनदयाल के विचारों को व्यवहार में उतार रही है।आज गरीबों के लिए पक्का मकान,रसोई गैस, मुफ्त इलाज, हर घर नल से जल, किसानों के लिए सम्मान निधि और गरीबों को मुफ्त राशन जैसी योजनाएं केवल योजनाएं नहीं, बल्कि गरीब के जीवन में सम्मान और आत्मविश्वास लौटाने का माध्यम बनी हैं।साहू ने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे बूथ स्तर पर जाकर यह सुनिश्चित करें कि सरकार की योजनाओं का लाभ पात्र व्यक्ति तक अवश्य पहुँचे।राजनीति सत्ता नहीं, सेवा और समर्पण का माध्यम है।वहीं रवि दुबे ने “एकात्म मानव दर्शन” की व्याख्या करते हुए कहा कि यह दर्शन मनुष्य के भौतिक, सामाजिक, बौद्धिक और आध्यात्मिक विकास का समन्वय करता है।दीनदयाल का मानना था कि केवल आर्थिक विकास पर्याप्त नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और नैतिक मूल्यों के साथ संतुलित विकास ही राष्ट्र को सशक्त बनाता है।दीनदयाल के विचारों को पढ़ें, समझें और सेवा, ईमानदारी व राष्ट्रभक्ति को अपने जीवन का मूल मंत्र बनाएं।पद छोटा हो या बड़ा, सेवा का भाव बड़ा होना चाहिए।

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