

धमतरी। श्री शिव महापुराण के छँटवे दिन में कथा व्यास पंडित ऋषभ त्रिपाठी ने जलंधर वध की कथा सुनाई की कैसे नारायण ने छल से वृंदा के पतिव्रत धर्म को नष्ट किया और महादेव ने जलंधर का वध किया आगे हिरण्याक्ष की और हिरण्यकश्यपु की कथा सुनाई और कहा कि हिरण्याक्ष का अर्थ है लोभ और हिरणकश्यपु का अर्थ है अभिमान जब लोभ और अभिमान बढ़ने लगता है तो स्वयं भगवान उसका वध करने के लिए आते है।साथ ही हनुमान जी के जन्म की कथा और रुद्राक्ष,बिल्वपत्र व भस्म के महिमा की कथा सुनाई।


