संस्कारों, संवेदनाओं और सृजनात्मकता का उत्सव बना “सृजन

2.0” आदित्य विद्या मंदिर, रावाँ का वार्षिकोत्सव रहा अविस्मरणीय, महात्यागी राम बालक दास एवं रंजना साहू हुई शामिल

धमतरी। आज के प्रतिस्पर्धात्मक और तेज़ी से बदलते शैक्षणिक परिवेश में, जहाँ शिक्षा प्रायः अंकों और उपलब्धियों तक सीमित होती जा रही है, ऐसे समय में आदित्य विद्या मंदिर, रावाँ द्वारा आयोजित वार्षिकोत्सव “सृजन 2.0” ने यह संदेश दिया कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल ज्ञान अर्जन नहीं, बल्कि संस्कार, संवेदना और समाज-निर्माण भी है,यह वार्षिकोत्सव मात्र रंगारंग प्रस्तुतियों का मंच नहीं था, बल्कि यह विद्यार्थियों, अभिभावकों और शिक्षकों की साधना और समर्पण का उत्सव बनकर उभरा। पूरे परिसर में अनुशासन, उल्लास और आत्मीयता का वातावरण स्पष्ट रूप से अनुभव किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राम बालक दास ने कहा कि जिस विद्यालय में माता-पिता का सम्मान, गुरु की मर्यादा और संस्कृति की जड़ें मजबूत होती हैं, वहाँ से निकलने वाली पीढ़ी कभी दिशाहीन नहीं होती।तथा विशिष्ट अतिथि रंजना डीपेंद्र साहू ने विद्यालय परिवार को बधाई देते हुए कहा कि ग्रामीण अंचल में रहते हुए भी जिस प्रतिबद्धता से शिक्षा के साथ संस्कारों को आगे बढ़ा रहा है, वह समाज के लिए अनुकरणीय उदाहरण है।वहीं श्री आर. पी. सिन्हा ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि ऐसे सांस्कृतिक आयोजनों से बच्चों के व्यक्तित्व में आत्मविश्वास, नैतिकता और सामाजिक चेतना का विकास होता है।वार्षिकोत्सव का सबसे भावुक और अविस्मरणीय क्षण मातृ-पितृ पूजन रहा।जब विद्यार्थियों ने मंच पर अपने माता-पिता तिलक किया और आशीर्वाद लिया, तब पूरा पंडाल भावविभोर हो उठा।यह केवल एक वार्षिकोत्सव नहीं, बल्कि समाज के लिए प्रेरणास्रोत और संस्कारों की अमूल्य धरोहर है।

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