

महाराज के प्रवचनों से भाव-विभोर हुए श्रद्धालु, अलौकिक क्षण बना आकर्षण
धमतरी। आमंत्रण हेरिटेज साहू सदन, रुद्री में आयोजित दुर्लभ सत्संग का सप्तम एवं अंतिम दिवस अत्यंत श्रद्धा, अनुशासन और आध्यात्मिक शांति के साथ संपन्न हुआ। इस अवसर पर श्रद्धेय विजयानंद गिरि महाराज के ओजस्वी, भावपूर्ण एवं जीवन को दिशा देने वाले प्रवचनों का लाभ बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्राप्त किया।
महाराज ने कहा कि अब समय आ गया है कि केवल ज्ञान को सुनने तक सीमित न रहकर उसे जीवन में उतारा जाए।दुख के महत्व को बताते हुए कहा कि दुख मनुष्य को भीतर से मजबूत बनाता है और आत्मबोध की ओर अग्रसर करता है।“भगवान कोई करने का विषय नहीं, बल्कि स्वीकार करने का विषय है।” पूर्ण समर्पण और स्वीकार भाव से ही वास्तविक शांति की अनुभूति संभव है।सत्संग के दौरान प्रवचन के बीच दो गाय मंच के समीप आकर शांत भाव से आगे बढ़ गईं, जिससे पूरा पंडाल अलौकिक शांति से भर गया।कार्यक्रम के समापन पर हलवा-पूड़ी का भंडारा आयोजित किया गया।


