

कम पानी में अधिक लाभ
धमतरी। किसान अब परंपरागत धान की खेती के साथ-साथ कम पानी में होने वाली दलहन एवं तिलहन फसलों की ओर तेजी से रुझान दिखा रहे हैं। जल संरक्षण, लागत में कमी और बेहतर आय की संभावनाओं को देखते हुए जिले के अनेक ग्रामों के किसान फसलचक्र को अपनाकर खेती को अधिक टिकाऊ और लाभकारी बना रहे हैं।फसल विविधीकरण की पहल में जिला प्रशासन एवं कृषि विभाग की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।किसानों को वैज्ञानिक खेती के प्रति जागरूक करने हेतु प्रशिक्षण आयोजित किए जा रहे हैं, जिसमें कम पानी में अधिक उत्पादन देने वाली फसलों की तकनीक, उन्नत किस्मों की जानकारी, संतुलित उर्वरक उपयोग तथा कीट-रोग प्रबंधन के उपाय बताए जा रहे हैं।साथ ही स्वस्थ एवं प्रमाणित बीज, उर्वरक, जैव खाद, तथा मिट्टी परीक्षण की सुविधा कराई जा रही है, जिससे फसल चयन और पोषक तत्व प्रबंधन अधिक सटीक हो सके।वर्तमान रबी सीजन में जिले में उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार सरसों की लगभग 1000 एकड़ क्षेत्र में, चना 1000 एकड़ में तथा मूंगफली 325 एकड़ क्षेत्र में 356 किसानों द्वारा की जा रही है। तथा गेहूँ की खेती भी सिंचित क्षेत्रों में निरंतर बढ़ रही है, जिससे किसानों को बाजार में स्थिर मांग और मूल्य का लाभ मिल रहा है।मेड़ों पर अरहर जैसी फसल लगाने से न केवल अतिरिक्त आय प्राप्त हो रही है, बल्कि भूमि की उर्वरता भी बनी रह रही है।


