

प्रभु की भक्ति, साधना व ध्यान लगाने से आनंद व आत्म संतोष की होती है अनुभूति : पलक
धमतरी। पंचमुखी हनुमान मंदिर पास आमापारा में आयोजित भागवत कथा के आठवें दिन कथा वाचिका पलक दुबे ने कहा कि व्यक्ति को ज्ञान जहां से भी मिले ले लेना चाहिए।भगवान की कथा जिसने भी श्रद्धा से सुनी उसके सभी कष्ट, पाप सब दूर हो जाते हैं।दत्तात्रेय भगवान ने कई प्राकृतिक तत्वों, जानवरों और मनुष्यों के आचरणों से ज्ञान प्राप्त कर 24 गुरु बनाए।राजा परीक्षित को तक्षक नाग के डसने के बाद, शुकदेव ने सात दिनों तक भागवत कथा सुनाई, जिससे उनका मन भौतिक संसार से हट गया और उन्हें मोक्ष प्राप्त हुआ।आगे कहा प्रभु को निःस्वार्थ भाव से याद करना चाहिए। फल प्राप्ति की लालसा से नहीं,जब भी याद करो तो यही कहो- हे प्रभु आप आनंद पूर्वक हमारे निवास पर पधारो और विराजमान रहे। जब प्रभु आपके घर पर रहने लगेंगे तो वह सब कुछ स्वतः मिल जाएगा,जो आप पाना चाहते थे।कथा के बाद देर शाम को शोभायात्रा निकाली गई,जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।


