
कम पानी, कम लागत, अधिक लाभ
धमतरी। विगत दिवस किसानक्राफ्ट द्वारा ग्राम भखारा में सूखे सीधी बुआई धान प्रौद्योगिकी पर एकदिवसीय गोष्ठी एवं प्रदर्शन कार्यक्रम आयोजित कर, किसानों को सूखे सीधे बीज वाले धान की तकनीक के लाभों और उपयोगिता से अवगत कराना था। इस तकनीक से पारंपरिक धान की तुलना में 50 प्रतिशत तक पानी की बचत होती है तथा उर्वरक, कीटनाशक और श्रम लागत में उल्लेखनीय कमी आती है।कृषि विस्तार अधिकारी बताया कि पारंपरिक धान की खेती में एक किलोग्राम धान के लिए लगभग 5,000 लीटर पानी की आवश्यकता होती है, जबकि सूखे सीधे बीज में मात्र 2,000 से 2,500 लीटर पानी पर्याप्त होता है।और कहा कि “धान की खेती भारत की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। ऐसे में इस तरह की तकनीकें पानी की कमी और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों से निपटने में सहायक सिद्ध होगी।
उत्पादन और लाभप्रदता में वृद्धि किसानक्राफ्ट के बीज अनुसंधान प्रमुख ने बताया कि इस तकनीक से किसान मिट्टी की उर्वरता के आधार पर अधिक उपज प्राप्त कर सकते हैं। स्वाद में कोई परिवर्तन नहीं होता और खेती की लागत में उल्लेखनीय कमी आती है, जिससे किसानों की लाभप्रदता बढ़ती है।इस विधि में नर्सरी तैयार करने, रोपाई करने या खेतों में पानी रोकने की आवश्यकता नहीं होती। यह पर्यावरण के अनुकूल है, जिससे मीथेन उत्सर्जन भी कम होता है।
किसानक्राफ्ट का योगदान कौशिक ने कहा कि किसानक्राफ्ट एक आईएसओ प्रमाणित निर्माता, थोक आयातक और उच्च गुणवत्ता वाले कृषि उपकरणों का वितरक है। यह कंपनी छोटे और सीमांत किसानों की आय व उत्पादकता बढ़ाने के लिए समर्पित है।


