दर्री में वर्षों बाद गूंजा रंगमंच

पुराने व नए कलाकारों की सहभागिता से ग्रामीण संस्कृति को मिला नया आयाम

धमतरी। आधुनिक युग की टीवी, मोबाइल और यूट्यूब की चकाचौंध से दूर, ग्राम दर्री में वर्षों बाद रंगमंच की विधा ने फिर से अपनी चमक बिखेरी। स्वतंत्र बाल समाज नाट्य मंडली द्वारा आयोजित नाट्य मंचन ‘मौरध्वज उर्फ शेर का भोजन’ ने न केवल दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया।यह आयोजन सिर्फ मनोरंजन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह एक सांस्कृतिक पुनर्जागरण साबित हुआ।यह हमारे पूर्वजों की विरासत को संजोने और अगली पीढ़ी को सौंपने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।यह नाटक प्रसिद्ध नाटककार नथाराम गौड़ शर्मा “हाथरस”द्वारा रचित एक संगीत प्रधान पौराणिक नाट्य कृति है, जिसमें वीर रस, रौद्र रस, हास्य, विलाप आदि भावों को विभिन्न शास्त्रीय और लोक संगीत की तर्ज़ों में प्रस्तुत किया गया।यह शैली भारत की समृद्ध नाट्य परंपरा की एक अनुपम झलक है, जिसे दर्री की नाट्य मंडली ने बड़े सम्मान और कला-निष्ठा के साथ सहेज कर प्रस्तुत किया।खास बात यह रही कि पुराने अनुभवी कलाकारों और नवोदित कलाकारों ने कंधे से कंधा मिलाकर अभिनय किया। इस समन्वय ने मंच को न सिर्फ जीवंत किया,बल्कि गाँव के भीतर कला और सांस्कृतिक चेतना को भी पुनर्जीवित किया।80 वर्षीय दशरथ साहू ने पुरानी कवि शैली में संवाद प्रस्तुत कर दर्शकों को भावविभोर कर दिया और यह संदेश दिया कि कला की कोई उम्र नहीं होती।आस्था, परंपरा और समर्पण का प्रतीक बना यह आयोजन।नाट्य प्रस्तुति की वीडियोग्राफी RK Studio (गुंडरदेही) एवं DKS Studio (दर्री) द्वारा की गई, जिसे यूट्यूब चैनल पर अपलोड किया जाएगा।

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