
भारतीय संस्कृति विरासत के रूप में आध्यात्मिकता को मानव कल्याण के लिए सहज रूप में प्रदान किया है: विज्ञान देव
धमतरी। जहां सत्य, श्रद्धा,समर्पण, सेवा भाव है वहीं आत्मा का कल्याण और परमात्मा का प्रकाश है।कथा प्रवर्तक संत विज्ञान देव महाराज ने राष्ट्रव्यापी स्वर्वेद सन्देश यात्रा में लगभग 40000 हजार कि मी की यात्रा कर धमतरी हरदिया साहू समाज भवन मे आयोजित जय स्वर्वेद कथा एवं ध्यान साधना सत्र में श्रद्धालुओं के मध्य व्यक्त किये।यात्रा कश्मीर के लाल चौक से तिरंगा और विहंगम योग का पावन ध्वजा ‘अ’ अंकित श्वेत ध्वजा फहराकर शुरुआत किया गया।भारतीय संस्कृति अत्यंत समृद्ध है।जो धर्म से लेकर मोक्ष की यात्रा कराती है। जो विश्व की आदि संस्कृति, विश्ववारा संस्कृति है। धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष की चतुःसूत्री ही भारतीय संस्कृति का आधार है।महाराज ने श्रद्धालुओं को विहंगम योग के क्रियात्मक योग साधना को सिखाया। कहा कि यह साधना खुद से खुद की दूरी मिटाने के लिए है।
निश्चित रूप से भारत अपनी संस्कृति अपने सभ्यता के वजह से विश्व का गुरु था, विश्व का गुरु है और विश्व का गुरु रहेगा।कश्मीर से कन्याकुमारी तक यह जमीन का टुकड़ा नहीं या हमारी माता है, हमारी मातृभूमि है। “माता भूमि पुत्रो अहं पृथिव्याः।कार्यक्रम में महापौर रामू रोहरा, पूर्व विधायक रंजना साहू, सह प्रदेश कार्यालय प्रभारी प्रीतेश गांधी, दीपेंद्र साहू,नरेंद्र साहू,श्याम अग्रवाल,अशोक साहू अध्यक्ष,पार्षद गण पिंटू यादव,विभा चंद्राकर,सुशीला तिवारी,जनपद सदस्य कीर्तन मिनपाल,अग्रवाल साहू, कांकेर जिला पंचायत अध्यक्ष किरण नरेटी, चंद्रभागा वर्मा, सुशीला तिवारी, राजेंद्र शर्मा, विहंगम योग के निदेशक बब्बन सिंह, चक्रधारी, मीना साहू, लक्ष्मी साहू, शिवरानी यदु, सोनम साहू,भुनेश्वरी साहू के साथ अत्याधिक संख्या में श्रद्धालुगण उपस्थित थे।


