
धमतरी। चरमुड़िया गांव में सुबह का सूरज जैसे ही उगता है,ताराचंद साहू के सपनों को भी रोशन कर देती हैं।पहले बिजली बिल1500–2000 रुपये तक आता था। खेती-किसानी करने वाले ताराचंद के लिए यह खर्च बोझ जैसा था। लेकिन आज वही सूरज सबसे बड़ी ताकत बन गया है।प्रधानमंत्री सूर्यघर-मुफ़्त बिजली योजना की जानकारी मिली, तो ताराचंद ने जोखिम उठाकर अपनाने का फैसला किया।और छत पर 3 किलोवाट का रूफटॉप सोलर पैनल लगवाया। 78 हजार रुपये केंद्र से और 30 हजार रुपये राज्य से सब्सिडी मिला।आज हालात पूरी तरह बदल गए हैं। बिजली बिल शून्य हो चुका है। इतना ही नही नेट मीटरिंग से अतिरिक्त बिजली बेचकर ताराचंद को आय का भी साधन मिल गया है। यह राहत उनके चेहरे की मुस्कान में साफ झलकती है।हमें गर्व भी है कि हम स्वच्छ और हरित ऊर्जा अपनाकर आने वाली पीढ़ियों के लिए अच्छा वातावरण बना रहे हैं।यह योजना सिर्फ ताराचंद के घर की कहानी नहीं है।परिवर्तन की शुरुआत है।गांवों में अब लोग हरित ऊर्जा की ओर आकर्षित हो रहे हैं।आत्मनिर्भर बनकर जीवन की नई राह पर बढ़ रहे हैं।


