पशुपालन से आत्मनिर्भरता और खुशहाली का एक मुकाम

बैंकों द्वारा 10 करोड़ के 15 प्रकरण बैंकों द्वारा स्वीकृत

धमतरी। कभी गांवों में पशुपालन को सिर्फ सहायक काम माना जाता था।लेकिन अब यही पशुपालन किसानों की आर्थिक रीढ़ बन गया है और गांव की खुशहाली की पहचान भी। खेतों के साथ-साथ गोठान और पशु शेड भी किसानों की आय बढ़ाने के साधन बन गए हैं।जिले में पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय पशुधन मिशन (NLM) के अंतर्गत उद्यमिता विकास कार्यक्रम (EDP) में भी जिले से उल्लेखनीय प्रगति हुई है। ये प्रकरण केवल कागज़ी आंकड़े नहीं हैं, बल्कि गांव-गांव में किसानों के सपनों को पंख देने वाली कहानियां हैं। कहीं ऋण लेकर आधुनिक डेयरी यूनिट खड़ा कर रहा है, तो कहीं महिलाओं की समिति बकरी पालन से आत्मनिर्भर बन रही है। ये प्रकरण कभी व्यक्तिगत तो कभी सामूहिक स्वरूप में स्वीकृत हुए हैं, लेकिन ग्रामीण जीवन को नई दिशा दी है।

किसानों की सुविधा के लिए किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) योजना भी गांवों तक पहुंची है।यह सिर्फ कर्ज नहीं, बल्कि किसान की मेहनत को पहचान और उसके सपनों को सहारा देने जैसा है। चाहे वह खेत में बीज बोने का मामला हो या पशुओं के लिए चारा खरीदने का, किसान क्रेडिट कार्ड ने आर्थिक चिंताओं को कम किया है।
राष्ट्रीय पशुधन मिशन (NLM) के तहत भी किसानों ने बड़ी पहल की है। बैकयार्ड पोल्ट्री, भेड़-बकरी पालन और पिगरी जैसी गतिविधियों से ग्रामीणों की जिंदगी बदल रही है। अब तक 37 प्रकरण भेजे गए हैं, जिनमें से 28 को मंजूरी मिल चुकी है।छोटे किसान के घर में पहले दो-तीन बकरियां ही थीं, अब उसी के पास दर्जनों बकरियों का झुंड है, जिससे वह न केवल अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहा है, बल्कि बाज़ार में भी अपनी पहचान बना रहा है।यह पहल केवल आर्थिक मजबूती का साधन नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव का जरिया भी है। महिलाएं अब घर की चारदीवारी से निकलकर समितियों में जुड़ रही हैं, अपने उत्पाद बेच रही हैं और घर की आय में बराबर की हिस्सेदारी निभा रही हैं। युवाओं को अब अपने ही गांव में रोजगार और व्यवसाय मिल रहा है

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