
टीकमचंद किरण राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित
धमतरी। हर साल 5 सितंबर को जब पूरा देश शिक्षक दिवस के जश्न में डूबा होता है, तो सबकी निगाहें एक ‘राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार’सम्मान है जो उन टीचर्स को दिए जाते हैं,जो सिर्फ बच्चों को किताबी ज्ञान नहीं ,बल्कि उनके जीवन को संवारा है, सही रास्ता दिखाया और शिक्षा के क्षेत्र में कुछ ऐसा किया है, जो काबिले तारीफ है.इन्ही में एक किसान परिवार का बेटा आज देश के सर्वोच्च शिक्षक सम्मान से नवाज़ा गया। यह कहानी है टीकमचंद किरण की, जो धमतरी के लाइवलीहुड कॉलेज में प्रशिक्षक हैं और जिनका नाम अब शिक्षा के इतिहास में सुनहरे अक्षरों से दर्ज हो गया है।विज्ञान भवन में आयोजित समारोह में ने राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार-2025 से सम्मानित किया। पदक और प्रशस्ति पत्र के साथ मिली पहचान ने न केवल उनके परिवार, बल्कि पूरे जिले का सीना गर्व से चौड़ा कर दिया।
युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने का मिशन पिछले 12 वर्षों से कम पढ़े लिखे 1200 से अधिक युवाओं को सुरक्षा गार्ड के रूप में प्रशिक्षित किया और बेहतर रोजगार के रास्ते खोले। वे कहते हैं “युवाओं को कौशल देना ही सबसे बड़ा निवेश है, क्योंकि यही आत्मनिर्भर बनाता है।प्रशिक्षण नौकरी तक नहीं रुकता। अनुशासन, आत्मविश्वास और जिम्मेदारी ये भी वे हर प्रशिक्षु को सिखाते हैं। आज सैकड़ों विद्यार्थी देशभर की सुरक्षा सेवाओं में कार्यरत हैं और अपने परिवार का सहारा बने हुए हैं।प्रशिक्षण सिर्फ पुरुषों तक सीमित नहीं होना चाहिए। कॉलेज में आयोजित एम्प्लॉयबिलिटी स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम के तहत 60 महिला युवाओं को मुफ्त प्रशिक्षण दिया।कौशल तिहार 2025 में लाभार्थियों को उपकरण किट वितरित की गईं, ताकि वे स्वरोजगार की ओर कदम बढ़ा सकें।इन प्रयासों ने कई युवतियों की ज़िंदगी बदली और आत्मनिर्भरता का आत्मविश्वास दिया।स्काउट-गाइड से जुड़कर बचपन से ही सेवा-भाव उनके व्यक्तित्व का हिस्सा बन गया। वे मानते हैं कि “अनुशासन ही सफलता का पहला कदम है। कलेक्टर ने बधाई दी,सम्मानित होते समय टीकमचंद की आँखों में चमक थी, लेकिन वह चमक व्यक्तिगत गौरव की नहीं, बल्कि हजारों युवाओं के सपनों की थी, जिन्हें अपने संघर्ष और प्रयास से दिशा दी है।टीकमचंद सिर्फ एक शिक्षक नहीं, असली मार्गदर्शक है जो राह दिखाने के साथ-साथ चलना भी सिखाते हैं।


