आजीविका मिशन से बदली तस्वीर,चर्रा की योगेश्वरी बनीं महिला सशक्तिकरण की प्रेरणा

मार्केटिंग के लिए सोशल मीडिया का लिया सहारा

धमतरी। ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।इसके माध्यम से महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जोड़कर स्वरोजगार, प्रशिक्षण, वित्तीय सहयोग और बाजार से जोड़ने का अवसर मिल रहा है।ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी ग्राम चर्रा की योगेश्वरी देवांगन की है,आजीविका मिशन के तहत कलेक्टर के मार्गदर्शन में योगेश्वरी,अध्यक्ष जय माँ परमेश्वरी स्वयं सहायता समूह ग्राम चर्रा का चयन राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित छठवें जेण्डर संवाद के लिए किया गया था ।इस संवाद में वे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से “महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए लैंगिक निवेश क्यों आवश्यक है” विषय पर अपने अनुभव साझा किए।देवांगन बताती हैं कि समूह से जुड़ने से पहले उनका परिवार आर्थिक रूप से कमजोर था।जिससे बच्चों की पढ़ाई, स्वास्थ्य और दैनिक जरूरतों को पूरा करना कठिन हो जाता था। लेकिन स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद उनकी सोच और जीवन दोनों में बड़ा बदलाव आया।इस
योजना से बैंक से ऋण प्राप्त किया तथा पशुपालन विभाग, कृषि विज्ञान केन्द्र और आर-सेटी से मुर्गीपालन का प्रशिक्षण लिया।पशिक्षण और मार्गदर्शन के बाद अपने गांव में देशी मुर्गी फार्म की स्थापना की।शुरुआत में सामाजिक दबाव और कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन उनकी दृढ़ इच्छाशक्ति और परिवार के सहयोग ने आगे बढ़ने की ताकत दी।आज योगेश्वरी का मुर्गी फार्म सफल उद्यम बन चुका है।उनके फार्म में तैयार होने वाली मुर्गियां और चूजे देश के विभिन्न क्षेत्रों तक पहुंच रहे हैं।देवांगन देशी मुर्गी फार्म चर्रा कुरूद” नाम से यूट्यूब चैनल भी संचालित कर रही हैं, जिसके माध्यम से वे अन्य ग्रामीण महिलाओं और युवाओं को भी स्वरोजगार के लिए प्रेरित कर रही हैं।योगेश्वरी का सपना है कि समूह की अधिक से अधिक महिलाएं भी स्वरोजगार से जुड़कर अपनी आय बढ़ाएं। इसी उद्देश्य से वे समूह की अन्य महिलाओं को प्रशिक्षण देकर उन्हें भी मुर्गीपालन जैसे व्यवसाय से जोड़ने का प्रयास कर रही हैं।साथ ही भविष्य में वे खरगोश पालन की भी शुरुआत करने की योजना बना रही हैं।

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