

धमतरी। छत्तीसगढ़ के वन प्रबंधन और जल संरक्षण मॉडल का अध्ययन करने के लिए भारतीय वन सेवा के 133 प्रोबेशनर अधिकारियों का दल पम्पारनाला पहुँचा।ये अधिकारी यहाँ 15 मार्च तक “सॉइल एंड वाटर कंजर्वेशन मेजर्स“ विषय पर जमीनी प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे।प्रधान मुख्य वन संरक्षक के निर्देशन में आयोजित इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने शिरकत की। तथा प्रशिक्षुओं को तकनीकी पहलुओं और वन प्रबंधन की बारीकियों से अवगत कराया।पम्पारनाला में पूर्व में यहाँ अत्यधिक मृदा अपरदन (सॉयल एरोज़न) और सूखे जैसी गंभीर समस्याएँ थीं।इन्हें दूर करने के लिए स्थल के अनुरूप वैज्ञानिक उपचार किए गए हैं।जैसे ब्रशवुड चेकडेम, लूज बोल्डर चेकडेम, गेबियन संरचनाएँ और 30-40 मॉडल का निर्माण।जिससे पम्पारनाला में अब बारहमासी जल भराव रहता है, जिससे न केवल ग्रामीणों को सिंचाई सुविधा मिली है, बल्कि वन्यप्राणियों के लिए भी पानी की उपलब्धता सुनिश्चित हुई है।प्रशिक्षु अधिकारियों को बेहतर समझ के लिए 8 समूहों में बांटा गया था।यह प्रशिक्षण दल 11 और 12 मार्च को कुसुमपानीनाला, कांसानाला और लकलकीनाला का दौरा करेगा। वहीं, 14 को दुगली स्थित वन धन विकास केन्द्र में वनों के दोहन, कूप मार्किंग और कटाई कार्य का व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त करेगा।


