
सरसों और मसूर में विस्तार, दलहन–तिलहन को मिला बढ़ावा
धमतरी। जिला ने कृषि विविधीकरण, जल संरक्षण और किसानों की आय वृद्धि की दिशा में जिला प्रशासन एवं कृषि विभाग के प्रयासों से परंपरागत फसल चक्र से आगे बढ़ते हुए कम पानी वाली, अधिक लाभकारी रबी फसलों को प्रोत्साहित किया गया, जिसके सकारात्मक परिणाम स्पष्ट रूप से सामने आ रहे हैं।जिले में ग्रीष्मकालीन धान के अत्यधिक जल उपयोग को दृष्टिगत रखते हुए 24,200 हेक्टेयर में आच्छादित क्षेत्र को रबी वर्ष में घटाकर 15,000 हेक्टेयर तक लाने की योजना बनाई गई है।इससे भू-जल संरक्षण के साथ-साथ किसानों को वैकल्पिक फसलों की ओर प्रेरित किया गया है।फसल चक्र का प्रभाव मूंगफली उत्पादन में विशेष रूप से देखने को मिला है।वहीं मक्का फसल का रकबा भी उल्लेखनीय रूप से बढ़ा है। विकासखंड नगरी के गट्टासिल्ली, बोराई एवं उमरगांव क्लस्टर मक्का उत्पादन के प्रमुख केंद्र बनकर उभरे हैं।तथा चना उत्पादन में भी जिले ने नई ऊंचाइयों को छुआ है।साथ विपणन की संभावनाएं भी सुदृढ़ हुई हैं।तेलहन और दलहन फसलों को बढ़ावा देते हुए सरसों तथा मसूर का रकबा 50 हेक्टेयर से बढ़ाकर 211 हेक्टेयर किया गया है।


