सुंदरकांड रामकथा में उमड़ा श्रद्धा का सागर

हनुमान भक्ति से भाव-विभोर हुआ धमतरी

धमतरी। गौशाला मैदान में आयोजित भव्य श्रीराम कथा क्रम में सुंदरकांड का दिव्य एवं अलौकिक प्रसंग अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के साथ संपन्न हुआ।महाराज ने कहा कि सुंदरकांड केवल एक कांड नहीं, बल्कि हनुमान जी के माध्यम से मानव जीवन को दिशा देने वाला अनुपम ग्रंथ है। इसमें भक्ति, साहस, विवेक, सेवा, त्याग और समर्पण के वे आदर्श समाहित हैं, जो हर परिस्थिति में मनुष्य का मार्गदर्शन करते हैं।कथा वाचक पं.अतुल कृष्ण महाराज ने सुंदरकांड के प्रत्येक श्लोक और प्रसंगों को अत्यंत जीवंत और भावनात्मक वर्णन किया।जिससे श्रद्धालु मंत्रमुग्ध होकर कथा श्रवण करते नजर आए।पूरा वातावरण  जयघोष हो उठा।महाराज ने कहा कि जब हनुमान ने स्वयं को निर्बल समझा, तब जामवंत ने उनकी शक्ति का स्मरण कराया।यह प्रसंग मानव जीवन को यह सीख देता है कि अक्सर मनुष्य अपनी क्षमताओं को भूल जाता है, और सच्चा मार्गदर्शक उसे आत्मबल का बोध कराता है।यह हमें सिखाता है कि प्रभु राम का स्मरण और हनुमान की भक्ति से असंभव कार्य भी संभव हो जाते हैं।भजनों की मधुर एवं संगीतमय प्रस्तुति ने कथा को और भी प्रभावशाली बना दिया।पंडाल में उपस्थित मातृशक्ति, युवा वर्ग और बुजुर्ग श्रद्धालु एक स्वर में जयघोष करते हुए भक्ति में लीन दिखाई दिए।आयोजन समिति के सदस्यों ने कहा इस प्रकार के आयोजनों से समाज में संस्कार, सद्भावना और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।समापन अवसर पर महाआरती, हनुमान जी एवं प्रभु श्रीराम की पूजा-अर्चना के पश्चात प्रसाद वितरण किया गया।समिति ने आगामी दिनों में रामकथा के अन्य महत्वपूर्ण प्रसंगों के आयोजन की जानकारी भी दी।

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