रामकथा के सातवें दिवस केवट प्रसंग ने भाव-विभोर किया श्रोताओं को

सेवा, प्रेम और समर्पण से ही मानव जीवन होता है सार्थक
धमतरी। रामकथा के सातवें दिवस भगवान श्रीराम के केवट प्रसंग पर कथा वाचक पं. अतुल कृष्ण ने कहा कि केवट प्रसंग भक्ति, विश्वास, सेवा और सामाजिक समरसता का अनुपम उदाहरण है।श्रीराम की दृष्टि में न कोई छोटा है, न बड़,वे केवल भाव को देखते हैं।केवट द्वारा प्रभु के चरण पखारकर चरणामृत को मस्तक पर धारण करना सच्ची भक्ति और सेवा का प्रतीक बताया गया।सच्चा भक्त प्रभु से कभी कुछ नहीं मांगता, बल्कि सेवा को ही अपना सौभाग्य मानता है। महाराज ने कहा कि आज के समय में जब समाज भेदभाव और स्वार्थ से ग्रस्त है, तब केवट प्रसंग हमें समरसता, मानवता और निस्वार्थ सेवा का मार्ग दिखाता है। यदि हम केवट जैसी निष्कपट भक्ति और प्रभु श्रीराम जैसी करुणा को अपने जीवन में उतार लें, तो मानव जीवन स्वतः ही सार्थक हो जाएगा।कथा श्रवण के पश्चात आयोजक पं. राजेश शर्मा ने कहा कि समाज ने हमें बहुत कुछ दिया है, अब हमारा कर्तव्य है कि हम भी समाज को कुछ लौटाएं। शहर और समाज को अपना परिवार मानकर सेवा भाव से कार्य करना ही इस कथा का सार है,जिसे वे सदैव तन, मन और धन से निभाते रहेंगे।कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुगण उपस्थित रहे, जिनमें शहर के गणमान्य नागरिक, समाजसेवी, चिकित्सक, व्यापारी एवं मातृशक्ति प्रमुख रूप से शामिल रही।यह आयोजन भक्ति, भाव और संदेश से परिपूर्ण रहा।

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