अब दलहन में आत्मनिर्भर बनेगा धमतरी, लोहरसी से हुई मजबूत शुरुआत

बीज के साथ मिला विश्वास, दलहन मिशन से किसानों को नई दिशा

धमतरी। दलहन आत्मनिर्भरता मिशन अंतर्गत जिले के ग्राम लोहरसी में किसानों को उड़द बीज का वितरण एवं तकनीकी मार्गदर्शन दिया गया।किसान धान के बदले रवि में दलहन -तिलहन की फसल अपना रहे है।साथ ही वे मखाना और औषधि की खेती भी कर रहे है।इसके लिए किसानों को प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है।दालें सिर्फ एक कृषि उत्पाद नहीं हैं; वे भारत की पोषण सुरक्षा, मृदा स्वास्थ्य और ग्रामीण आजीविका का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।दुनिया में दालों के सबसे बड़े उत्पादक, उपभोक्ता और आयातक के रूप में, भारत की नीतियां लगातार इस क्षेत्र में उत्पादकता और स्थिरता बढ़ाने पर केंद्रित रही हैं।बढ़ती आय और संतुलित पोषण के प्रति बढ़ती जागरूकता के साथ, दालों की मांग लगातार बढ़ रही है, जिससे घरेलू उत्पादन बढ़ाने के अवसर पैदा हो रहे हैं।राष्ट्रीय पोषण संस्थान के अनुसार,भारतीय आहार में कुल प्रोटीन की मात्रा में इनका योगदान लगभग 20-25 प्रतिशत है।इसलिए, घरेलू उत्पादन बढ़ाना न केवल आर्थिक आवश्यकता है, बल्कि जन स्वास्थ्य में सुधार की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है।भारत सरकार ने दलहन क्षेत्र को मजबूत करने पर विशेष जोर देते हुए 11 अक्टूबर को नई दिल्ली स्थित भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईएआरआई) में एक विशेष कृषि कार्यक्रम आयोजित किया गया जहां प्रधानमंत्री ने 11,440 करोड़ रुपये के कुल परिव्यय के साथ दलहन आत्मनिर्भरता मिशन (दलहन आत्मनिर्भरता मिशन) का शुभारंभ किया था।प्रधानमंत्री ने दलहन की खेती में लगे किसानों से बातचीत भी की और कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों में मूल्य श्रृंखला आधारित विकास को बढ़ावा देने के पर प्रकाश डाला था।

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